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Kargil to Kanyakumari run 4200 km: कारगिल से कन्याकुमारी तक 4200 KM की दौड़: 55 दिनों में देश नाप रहे इंदौर के अल्ट्रा रनर कार्तिक जोशी

GGaganpreet Kaur
कारगिल से कन्याकुमारी तक 4200 KM की दौड़: 55 दिनों में देश नाप रहे इंदौर के अल्ट्रा रनर कार्तिक जोशी
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अंबाला। अंबाला पहुंचने पर अल्ट्रा रनर कार्तिक जोशी के चेहरे पर थकान से ज्यादा एक अलग सा संतोष नजर आया। मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले कार्तिक ने देश को फिटनेस के प्रति जगाने के लिए एक ऐसा संकल्प लिया है, जिसे सुनकर ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। उनका यह सफर सिर्फ एक छोर से दूसरे छोर को जोड़ना नहीं है, बल्कि यह इंसानी सीमाओं को चुनौती देने जैसा है। 55 दिनों के इस बेहद कड़े टाइम-फ्रेम में 4200 किलोमीटर नापना यानी रोज औसतन 75 से 80 किलोमीटर दौड़ना। खेल की भाषा में कहें तो कार्तिक हर दिन बिना रुके लगभग दो फुल मैराथन पूरी कर रहे हैं।

माइनस 11 डिग्री से 39 डिग्री का टॉर्चर, पर कदम नहीं हुए पीछे

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कार्तिक जोशी ने बताया कि जब उन्होंने द्रास और कारगिल से दौड़ना शुरू किया था, तब वहां का तापमान माइनस 11 डिग्री सेल्सियस था, जहां सांस लेना भी दूभर होता है। जैसे-जैसे वह मैदानी इलाकों की तरफ बढ़े, मौसम का मिजाज बदलता गया और अब वह हरियाणा-पंजाब की 39 डिग्री सेल्सियस की तपती धूप और लू के थपेड़ों के बीच दौड़ रहे हैं। यह शारीरिक से ज्यादा मानसिक मजबूती की परीक्षा है। इस पूरे रास्ते में वह 3 केंद्र शासित प्रदेशों, 7 राज्यों, 37 बड़े शहरों और 600 से अधिक गांवों से होकर गुजर रहे हैं, जहां जगह-जगह लोग इस ‘रनिंग संन्यासी’ का हौसला बढ़ाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।

वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ खेल प्रतिभाओं को संवारने की अनूठी मुहिम

यह दौड़ सिर्फ नाम कमाने या वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाने के लिए नहीं है। कार्तिक जोशी के इस अभियान के पीछे एक बेहद नेक और दूरगामी सोच छिपी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में भावुक होते हुए कहा, “हमारे देश के गांवों और कस्बों में टैलेंट की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ सही सपोर्ट की।” कार्तिक इस यात्रा के दौरान पूरे भारत से ऐसे 100 ग्रासरूट (जमीनी स्तर) के एथलीट्स की पहचान कर रहे हैं, जो बेहद गरीब परिवारों से आते हैं। इन चुनिंदा 100 खिलाड़ियों को वह गोद लेंगे और अगले एक साल तक उनकी स्पोर्ट्स किट, महंगे न्यूट्रिशन और प्रोफेशनल ट्रेनिंग का पूरा खर्च उठाएंगे, ताकि देश को आने वाले समय में नए ओलंपिक मेडल विजेता मिल सकें।

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