चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा में मई दिवस के मौके पर बुलाए गए सत्र के दौरान उस समय हंगामा हो गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान और कांग्रेस विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। सदन में मोबाइल फोन के इस्तेमाल और बैठने के तौर-तरीकों को लेकर विवाद बढ़ा, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान मुख्यमंत्री मान भावुक हो गए और उन्होंने अपनी बेटी को लेकर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों पर सदन में मोबाइल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इस पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। इसके बाद कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा के बैठने के तरीके को लेकर विवाद खड़ा हो गया। AAP विधायकों ने उनसे पैर नीचे करके बैठने को कहा, जिस पर बहस और तेज हो गई।
CM मान हुए भावुक, विपक्ष का वॉकआउट
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने स्पीकर से कहा कि गैलरी में बैठे लोगों को भी नियमों का पालन करना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी विधायक उनकी बेटी के बारे में गलत टिप्पणियां कर रहे हैं, जिससे वह भावुक हो गए। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद कांग्रेस के कई विधायक सदन से वॉकआउट कर गए। इस पूरे घटनाक्रम ने विधानसभा के माहौल को और गरमा दिया और सत्र की कार्यवाही प्रभावित हुई। राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी सरकार विधानसभा में विश्वास मत लाने की तैयारी कर रही है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, पंजाब अध्यक्ष और मंत्री अमन अरोड़ा इस प्रस्ताव को पेश कर सकते हैं। यह कदम पार्टी के 94 विधायकों की एकजुटता और समर्थन को परखने के लिए उठाया जा रहा है।
सांसदों के पार्टी छोड़ने से बढ़ी चिंता
हाल ही में AAP के छह राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह और राजिंदर गुप्ता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद पार्टी को विधायकों के टूटने का डर सताने लगा है। खासकर चड्ढा और पाठक की भूमिका को देखते हुए नेतृत्व सतर्क है। AAP ने जालंधर में विधायकों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें 94 में से केवल 65 विधायक ही शामिल हुए। हालांकि 117 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 59 सीटें ही पर्याप्त हैं, इसलिए सरकार को तत्काल खतरा नहीं है। फिर भी फ्लोर टेस्ट के जरिए पार्टी अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहती है।
2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए AAP यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके पास स्पष्ट बहुमत है। फ्लोर टेस्ट के जरिए पार्टी विपक्ष के आरोपों का जवाब देना चाहती है। विपक्ष पहले ही दावा कर चुका है कि बड़ी संख्या में विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं, ऐसे में यह कदम राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
