Uttarakhand Dussehra 2026: उत्तराखंड में विजयादशमी के अवसर पर दशहरे की तैयारियां पूरी हो गई हैं। देहरादून से लेकर अल्मोड़ा, हल्द्वानी और ऋषिकेश तक रावण दहन के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। देहरादून के परेड ग्राउंड में इस बार 181 फीट ऊंचे रावण का दहन मुख्य आकर्षण रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रिमोट के जरिए रावण का दहन करेंगे। वहीं, अल्मोड़ा में रावण के परिवार के 23 पुतलों का जुलूस निकाला जाएगा। हल्द्वानी और ऋषिकेश में भी 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले जलाए जाएंगे।
देहरादून के परेड ग्राउंड में रावण दहन के लिए 181 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया है। इसके साथ मेघनाद और कुंभकरण के 70-70 फीट ऊंचे पुतले भी जलाए जाएंगे। तीनों पुतलों को हरियाणा के तेजिंदर सिंह चौहान और उनकी टीम ने तैयार किया है। इस बार इन्हें बनाने में करीब 31 लाख रुपये खर्च हुए हैं। तेजिंदर सिंह चौहान पिछले 41 साल से रावण के पुतले बना रहे हैं। उनके बनाए पुतलों को कई रिकॉर्ड बुक में जगह मिल चुकी है। वर्ष 2013 में उनके काम को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था। उनकी टीम में हिंदू और मुस्लिम कारीगर साथ मिलकर पुतले तैयार करते हैं। इस बार भी करीब 40 कारीगरों ने दिन-रात मेहनत करके तीनों पुतलों को तैयार किया है।
पुतलों को बनाते समय मौसम का भी ध्यान रखा गया है। बारिश से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कपड़े और फाइबर ग्लास जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इससे हल्की बारिश होने पर पुतलों के खराब होने की आशंका कम रहेगी। दशहरे के दिन परेड ग्राउंड में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रावण दहन किया जाएगा।
अल्मोड़ा में रावण परिवार के 23 पुतले, ढोल-नगाड़ों के साथ निकलेगा जुलूस
अल्मोड़ा का दशहरा अपनी कलात्मकता और अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां दशहरे पर केवल रावण का पुतला नहीं बनाया जाता, बल्कि उसके परिवार के कई पात्रों के पुतले भी तैयार किए जाते हैं। इस बार अलग-अलग मोहल्लों के कलाकारों ने मिलकर रावण परिवार के 23 पुतले बनाए हैं। दशहरे के दिन इन पुतलों को ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस के रूप में शहर के बाजारों से निकाला जाएगा। इसके बाद स्टेडियम के पास निर्धारित स्थल पर इनका दहन किया जाएगा। अलग-अलग मोहल्लों के कलाकारों की ओर से तैयार किए गए पुतलों की बनावट और सजावट इस आयोजन का खास आकर्षण रहती है। इस बार भी 23 पुतलों के जुलूस को लेकर लोगों में उत्साह है। अल्मोड़ा की इस परंपरा में स्थानीय कलाकारों की मेहनत और शिल्पकला देखने को मिलती है। पुतलों को तैयार करने में अलग-अलग मोहल्लों के लोगों की भागीदारी रहती है। दशहरे के दिन बाजारों से गुजरने वाला जुलूस शहर के उत्सव का अहम हिस्सा बनता है।
हल्द्वानी में 60 फीट के रावण की चलती दिखेंगी आंखें और मुंह
हल्द्वानी में दशहरे पर 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। यहां दिवंगत शंभू बाबा की परंपरा को उनके शिष्य आगे बढ़ा रहे हैं। शंभू बाबा के शिष्य वीरपाल के मुताबिक, पुतले तैयार करते समय पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है। इन्हें घास और कागज से बनाया जा रहा है और आयोजकों के अनुसार पुतले प्रदूषण मुक्त हैं। इस बार हल्द्वानी के रावण के पुतले में खास तकनीकी आकर्षण भी रखा गया है। 60 फीट ऊंचे पुतले की दोनों आंखें और मुंह चलते हुए दिखाई देंगे। इसे आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है, जिससे रावण दहन से पहले भी दर्शकों का ध्यान इस ओर खिंचेगा।
ऋषिकेश में 1964 से पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार
ऋषिकेश में भी दशहरे पर 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। यहां रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले बनाने की परंपरा से एक मुस्लिम परिवार 1964 से जुड़ा हुआ है। उसी वर्ष IDPL रामलीला कमेटी ने पहली बार रावण दहन का आयोजन शुरू किया था। उस समय मुजफ्फरनगर के रियाजुद्दीन ने रावण का पुतला तैयार किया था। इसके बाद उनका परिवार लगातार इस काम को आगे बढ़ाता रहा। इस बार तीनों पुतलों को तैयार करने में करीब डेढ़ महीने का समय लगा है। दशहरे पर इन पुतलों का दहन किया जाएगा। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा धार्मिक आयोजनों में विभिन्न समुदायों के कारीगरों की भागीदारी को भी सामने लाती है। उत्तराखंड के इन शहरों में दशहरे के आयोजन अलग-अलग खासियत के साथ हो रहे हैं। देहरादून में विशाल रावण का पुतला, अल्मोड़ा में 23 पुतलों का जुलूस और हल्द्वानी-ऋषिकेश में 60 फीट ऊंचे रावण के दहन को लेकर तैयारियां की गई हैं। महानवमी पर CM धामी ने किया हवन-कन्या पूजन, नौ कन्याओं का आशीर्वाद लेकर मांगी प्रदेश की खुशहाली

