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‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ में यकीन करने वाली स्थिति में नहीं जा सकते: सिब्बल

JJagmarg Desk
‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ में यकीन करने वाली स्थिति में नहीं जा सकते: सिब्बल
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नयी दिल्ली: राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म किया गया है, जो वैश्विक शांति के लिए अच्छा नहीं है।

तेहरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के कुछ दिनों बाद, सिब्बल ने यहां ईरानी दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि उस स्थिति में नहीं जाया जा सकता जहां कुछ राष्ट्र ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ में यकीन करते हैं।

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पत्रकारों से निर्दलीय सांसद ने कहा कि जिस तरह से अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की गई, उस पर मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करने के लिए यहां आया हूं। सिब्बल ने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं, और मुझे यकीन है कि हर देश का मानना ​​है कि संघर्षों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए, न कि सामूहिक विनाश के हथियारों के इस्तेमाल के जरिए। वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म किया गया है। यह वैश्विक शांति या किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि हम ऐसी स्थिति में नहीं लौट सकते हैं जहां राष्ट्र मानते हैं कि जिसकी लाठी उसकी भैंस, यह जंगल का कानून है।

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