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West Bengal Voter List बंगाल चुनाव 2026: मतदाता सूची से 91 लाख नाम कटे, मुर्शिदाबाद और मालदा में मचा हड़कंप

AAmandeep Singh
बंगाल चुनाव 2026: मतदाता सूची से 91 लाख नाम कटे, मुर्शिदाबाद और मालदा में मचा हड़कंप
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पश्चिम बंगाल।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘वोटर लिस्ट’ हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उन्होंने राजनीतिक पंडितों और दलों के होश उड़ा दिए हैं। विशेष गहन संशोधन (SIR) की लंबी न्यायिक प्रक्रिया सोमवार मध्यरात्रि को संपन्न हुई, जिसके बाद राज्य की मतदाता सूची से करीब 91 लाख (90,83,345) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना बंगाल के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी घटना मानी जा रही है, जो आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों को पूरी तरह पलट सकती है।

न्यायिक जांच के बाद बढ़ा आंकड़ा

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मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, यह कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। कुल 60 लाख से ज्यादा संदिग्ध मामलों को गहन न्यायिक जांच के लिए भेजा गया था। इनमें से 59.84 लाख मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है और संबंधित अधिकारियों ने डिजिटल हस्ताक्षर (e-sign) के जरिए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में पाया गया कि इनमें से 27 लाख से अधिक मतदाता ‘हटाए जाने योग्य’ (Delatable) थे। बता दें कि नवंबर में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ थी, जो अब इस भारी कटौती के बाद काफी नीचे आ गई है।

मुर्शिदाबाद और मालदा में ‘वोटर सुनामी’

हटाए गए नामों के जिलावार विश्लेषण ने राजनीतिक गलियारों में विवाद की चिंगारी सुलगा दी है। सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक बहुल और सीमावर्ती जिलों में देखा गया है:

मुर्शिदाबाद: यहां रिकॉर्ड 4,55,137 नाम सूची से बाहर किए गए हैं।

उत्तर 24 परगना: इस जिले में 3,25,666 मतदाताओं की छंटनी हुई है।

मालदा: यहां 2,39,375 नाम हटाए गए हैं।

इन जिलों में विपक्षी दल अक्सर ‘फर्जी’ और ‘दोहरी’ नागरिकता वाले मतदाताओं का मुद्दा उठाते रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाने की साजिश करार दे सकता है।

अपील का रास्ता खुला, 19 ट्रिब्यूनल करेंगे सुनवाई

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम सूची नहीं है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके लिए पूरे राज्य में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए हैं। जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज हैं, वे इन न्यायाधिकरणों में चुनौती दे सकते हैं। यदि दावे सही पाए गए, तो नाम बहाल किए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय: बदल सकता है सत्ता का समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 91 लाख मतदाताओं का हटना कोई मामूली बात नहीं है। बंगाल में कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बहुत कम रहता है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में ‘फर्जी’ या ‘मृत’ मतदाताओं के नाम हटने से उन निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला बिल्कुल नया हो जाएगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक दल इस ‘सफाई अभियान’ पर क्या रुख अपनाते हैं और आने वाले दिनों में कितनी अपीलें दायर की जाती हैं।

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