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Car Dashboard Alert: भीषण गर्मी में कार के डैशबोर्ड पर फोन भूलकर भी न रखें, हो सकता है बड़ा ब्लास्ट!

AAmandeep Singh
Car Dashboard Alert: भीषण गर्मी में कार के डैशबोर्ड पर फोन भूलकर भी न रखें, हो सकता है बड़ा ब्लास्ट!
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टेक्नोलॉजी। मई-जून की इस झुलसाने वाली गर्मी में जब इंसान का बाहर निकलना मुहाल हो जाता है, तब हमारी खड़ी कारें किसी भट्टी की तरह तपने लगती हैं। अक्सर देखा जाता है कि गाड़ी चलाते समय नेविगेशन देखने के लिए या फिर गाड़ी पार्क करते वक्त लोग अपने स्मार्टफोन को डैशबोर्ड पर ही छोड़ देते हैं। पहली नजर में यह एक बेहद सामान्य और हानिरहित सी आदत लगती है, लेकिन ऑटोमोबाइल और टेक एक्सपर्ट्स की मानें तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे की टाइमलाइन तय कर रही होती है। बंद कार के भीतर सीधे कांच से छनकर आने वाली धूप डैशबोर्ड को इस कदर तपा देती है कि वहां रखा आपका कीमती गैजेट एक टिक-टिक करते बम में तब्दील हो सकता है।

बैटरी बन सकती है टाइम बम; जानिए इसके पीछे का विज्ञान

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आजकल के लगभग सभी स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी का इस्तेमाल होता है। ये बैटरियां एक निश्चित तापमान (आमतौर पर 35 से 45 डिग्री) तक ही सुरक्षित ढंग से काम करने के लिए डिजाइन की जाती हैं। जब कार धूप में खड़ी होती है, तो ‘ग्रीनहाउस इफेक्ट’ के कारण कार के अंदर का तापमान कुछ ही मिनटों में 60 से 70 डिग्री तक पहुंच जाता है। इतनी भीषण गर्मी में बैटरी के अंदर केमिकल रिएक्शन अनियंत्रित हो जाता है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘थर्मल रनवे’ कहते हैं। इसमें बैटरी पहले फूलती है, फिर उसमें से जहरीली गैसें निकलती हैं और अंत में वह भयानक ब्लास्ट के साथ सुलग उठती है। अगर गाड़ी लावारिस खड़ी है, तो यह छोटा सा ब्लास्ट पूरी कार को खाक करने के लिए काफी है।

स्क्रीन से लेकर मदरबोर्ड तक; अंदरूनी कबाड़ की कहानी

बैटरी फटने के खतरे से इतर, अगर आपका फोन ब्लास्ट नहीं भी होता है, तो भी वह अंदरूनी तौर पर पूरी तरह अपाहिज हो जाता है। डैशबोर्ड की सीधी मार आपके फोन के इन तीन हिस्सों को सबसे पहले बर्बाद करती है:

डिस्प्ले का पिघलना: अत्यधिक गर्मी के कारण एमोलेड (AMOLED) या एलसीडी (LCD) स्क्रीन के भीतर के लिक्विड क्रिस्टल हमेशा के लिए डैमेज हो जाते हैं। इसके अलावा, स्क्रीन को बॉडी से चिपका कर रखने वाला खास ग्लू (गोंद) पिघल जाता है, जिससे डिस्प्ले बाहर आ जाता है।

मदरबोर्ड का डेड होना: अत्यधिक तापमान को देखते ही फोन का प्रोसेसर खुद को बचाने के लिए ‘थर्मल थ्रॉटलिंग’ मोड में चला जाता है। फोन बार-बार हैंग या स्विच ऑफ होने लगता है। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने पर मदरबोर्ड के नाजुक सोल्डरिंग जॉइंट्स पिघल जाते हैं और फोन हमेशा के लिए डेड हो जाता है।

कैमरा सेंसर का धुंधलापन: डैशबोर्ड पर सीधे धूप पड़ने से कैमरे के लेंस और उसके पीछे लगे संवेदनशील सेंसर की क्लेरिटी खत्म हो जाती है, जिससे महंगे से महंगे फोन का कैमरा भी धुंधली तस्वीरें देने लगता है।

जेब और जान दोनों को सुरक्षित रखने के स्मार्ट तरीके

एक्सपर्ट्स की जरूरी सलाह:

अगर आप इस गर्मी में अपनी कार और फोन दोनों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो अपनी कुछ आदतों को तुरंत बदल डालिए। फोन को कभी भी डैशबोर्ड या सीधे धूप के संपर्क में आने वाले मोबाइल होल्डर्स पर न लगाएं।

इसके बजाय आप इन सुरक्षा उपायों को अपना सकते हैं:

एसी वेंट होल्डर का करें इस्तेमाल: मोबाइल को हमेशा कार के एसी वेंट (AC Vent) पर लगने वाले क्लिप होल्डर में फिक्स करें। इससे ड्राइविंग के दौरान एसी की ठंडी हवा आपके फोन के तापमान को नियंत्रित रखेगी।

सनशेड है बेहद जरूरी: जब भी गाड़ी को खुले में या धूप में पार्क करना पड़े, तो फ्रंट विंडशील्ड पर रिफ्लेक्टिव सनशेड का इस्तेमाल जरूर करें। यह केबिन के तापमान को काफी हद तक बढ़ने से रोकता है।

गैजेट्स को छुपाकर रखें: गाड़ी से उतरते वक्त फोन को डैशबोर्ड पर छोड़ने के बजाय गियर कंसोल के पास बने कप होल्डर, आर्मरेस्ट बॉक्स या फिर ग्लोव बॉक्स (डैशबोर्ड का बंद दराज) के अंदर रखें, जहां सीधी धूप न पहुंचती हो।

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