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World Milk Day 2026: World Milk Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व दुग्ध दिवस? जानिए इस बार की खास थीम और इतिहास

GGaganpreet Kaur
क्यों मनाया जाता है विश्व दुग्ध दिवस? जानिए इस बार की खास थीम और इतिहास
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World Milk Day 2026: सुबह की शुरुआत करने वाली चाय की चुस्की हो या फिर बच्चों की सेहत का ख्याल, दूध हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा है जिसके बिना पोषण की कल्पना अधूरी लगती है। आधुनिक जीवनशैली में भले ही पैक्ड और फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ा हो, लेकिन सेहत और संतुलित आहार के मामले में दूध का कोई सानी नहीं है। इसी अहमियत को वैश्विक मंच पर दर्ज कराने के लिए हर साल 1 जून को ‘विश्व दुग्ध दिवस’ (World Milk Day) मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ दूध पीने की अच्छी आदत को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों पशुपालकों और डेयरी किसानों के प्रति आभार जताने का भी मौका है जिनकी बदौलत हर घर तक शुद्ध पोषण पहुंचता है।

कैसे हुई इस खास दिन की शुरुआत?

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दूध को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाने की कवायद आज से करीब ढाई दशक पहले शुरू हुई थी। संयुक्त राष्ट्र की विशेष संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने साल 2001 में पहली बार विश्व दुग्ध दिवस मनाने का फैसला किया था। इसके पीछे की सोच बिल्कुल साफ थी—दुनिया को यह समझाना कि दूध सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं है, बल्कि यह कुपोषण के खिलाफ लड़ाई का एक बड़ा हथियार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने वाला जरिया है। तब से लेकर आज तक हर साल 1 जून को दुनिया के तमाम देश इस अभियान से जुड़कर डेयरी सेक्टर के विकास पर चर्चा करते हैं।

साल 2026 की थीम: आधी आबादी के हुनर को सलाम

इस बार का विश्व दुग्ध दिवस एक बेहद खास संदेश के साथ आया है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम ‘Celebrating Women Farmers’ यानी ‘महिला किसानों का उत्सव’ तय की गई है। ग्रामीण भारत से लेकर दुनिया के तमाम कोनों तक पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के काम में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कम नहीं है। सुबह तड़के उठकर पशुओं की देखभाल करने से लेकर दूध को मंडियों तक पहुंचाने के प्रबंधन में महिलाएं कमान संभाल रही हैं। इस साल की थीम उनके इसी मूक लेकिन सबसे महत्वपूर्ण योगदान, उनके परिश्रम और नेतृत्व क्षमता को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने का प्रयास है।

सेहत और अर्थव्यवस्था का मजबूत जोड़

चिकित्सकों और पोषण विशेषज्ञों की मानें तो दूध कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-डी, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे जरूरी तत्वों का प्राकृतिक भंडार है। बच्चों के शारीरिक विकास से लेकर बुजुर्गों की हड्डियों को महफूज रखने तक, दूध हर उम्र के इंसान के लिए जरूरी है। आज के दौर में जब खान-पान से जुड़े कई तरह के रोग बढ़ रहे हैं, तब दूध को अपनी डाइट में शामिल करना और भी प्रासंगिक हो जाता है। इसके अलावा, यह सेक्टर सिर्फ सेहत ही नहीं सुधार रहा, बल्कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में करोड़ों भूमिहीन और छोटे किसानों की आजीविका का सबसे भरोसेमंद साधन बना हुआ है।

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