World Post Day: एक दौर था जब गांव-मुहल्ले की गलियों में डाकी की साइकिल की घंटी बजते ही घरों के दरवाजे खुल जाया करते थे। किसी मां को सरहद पर तैनात बेटे की चिट्ठी का इंतजार होता था, तो कोई दुल्हन दूर शहर गए पति के कुशल-क्षेम के लिए डाकिए की राह तकती थी। लिफाफा हाथ में आते ही लिखावट देखकर ही दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं और खत खोलकर पढ़ने की वह आतुरता शब्दों से परे थी। वे कागज के टुकड़े सिर्फ संदेश नहीं लाते थे, बल्कि उनमें अपनों की सांसें, चिंता और प्यार बसा होता था। लोग उन खतों को बार-बार पढ़ते और बरसों तक किताबों या अलमारियों के सबसे सुरक्षित कोने में सहेजकर रखते थे।
तकनीक ने दूरी घटाई, लेकिन क्या मिठास भी कम हुई?
आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है। सेकंडों में वॉट्सएप संदेश, वॉइस नोट और एचडी वीडियो कॉल के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से पलक झपकाते ही बात हो जाती है। अब न तो संदेशों का इंतजार बचा है और न ही वह बेसब्री। हर साल 9 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व डाक दिवस (World Post Day) हमें इसी बड़े बदलाव पर ठिठककर सोचने का मौका देता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि डिजिटल तकनीक ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान और रफ्तार से भर दिया है, लेकिन हाथ से लिखे खतों की अपनी एक अलग दुनिया थी, जहां हर शब्द के साथ लिखने वाले की भावनाएं सीधे कागज पर उतरती थीं।
कटी हुई लिखावट और लिफाफे में बंद वो एहसास
हाथ से लिखी चिट्ठी की असली खूबसूरती उसकी सादगी में होती थी। खत में अगर कोई शब्द काटकर दोबारा लिखा गया हो, स्याही का कोई निशान छूट गया हो या पन्ने के नीचे खाली जगह में अचानक याद आया कोई छोटा सा संदेश जोड़ दिया गया हो—ये तमाम बातें उस खत को एक रूहानी रूप दे देती थीं। कई बार चिट्ठी में कोई बहुत दार्शनिक बात नहीं लिखी होती थी, सिर्फ इतना लिखा होता था—”अपना ख्याल रखना, तुम्हारी बहुत याद आती है।” मगर जब यही दो लाइनें अपने हाथ से कागज पर उकेरी जाती थीं, तो उनका अहसास ही बदल जाता था। लोग आज भी जब पुराने खत पढ़ते हैं, तो उन्हें गुजरा हुआ जमाना और अपने पुराने रिश्ते ज्यों के त्यों सामने खड़े दिखते हैं।
वॉट्सएप चैट डिलीट हो जाएगी, पर खतों का जादू बना रहेगा
स्मार्टफोन और डिजिटल माध्यम आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं। फोटो, वीडियो और चैट के जरिए संपर्क साधे रखना बेहद सुलभ है, लेकिन डिजिटल बातचीत अक्सर वक्त के साथ कहीं खो जाती है। फोन बदलते ही या स्टोरेज साफ करते ही महीनों पुरानी चैट गायब हो जाती है। इसके ठीक उलट, खत भौतिक रूप से मौजूद रहते हैं। वे वक्त के साथ पीले भले पड़ जाएं, लेकिन जब भी आप उन्हें सालों बाद खोलेंगे, तो अतीत की खुशबू हवा में तैरने लगेगी। संदेशों में बातें तो तुरंत हो जाती हैं, लेकिन खतों में वादे और जज्बात ठहर जाते हैं।
इस डाक दिवस पर खुद भी उठाइए कलम
चिट्ठियों का दौर अब भले ही इतिहास की किताबों और यादों में सिमट रहा हो, लेकिन उसका जादू आज भी बरकरार है। इस विश्व डाक दिवस के मौके पर क्यों न एक पुरानी शुरुआत की जाए? अपने मोबाइल को थोड़ी देर किनारे रखकर एक सादा कागज और कलम उठाइए। किसी दोस्त, माता-पिता या दिल के करीब किसी खास इंसान को अपने दिल का हाल लिखकर भेजिए। अगर कोई न मिले, तो एक खत खुद के नाम ही लिख डालिए। यकीन मानिए, कागज पर उकेरा गया आपका यह छोटा सा खत किसी के चेहरे पर ऐसी मुस्कान ला सकता है, जो दुनिया का कोई डिजिटल इमोटिकॉन नहीं ला सकता।

