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Staff Shortage Government Hospital: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा! कांग्रेस का हल्ला बोल, बोले— "गरीबों का हक मार रही है सरकार"

GGaganpreet Kaur
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा! कांग्रेस का हल्ला बोल, बोले— "गरीबों का हक मार रही है सरकार"
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यमुनानगर। यमुनानगर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सरकारी अस्पतालों में सफेद एप्रन वाले ‘फरिश्तों’ (डॉक्टरों) की भारी कमी को लेकर आज कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार किया। जिला शहरी और ग्रामीण कांग्रेस इकाइयों ने साझा तौर पर जगाधरी स्थित सिविल अस्पताल के बाहर सरकार की ‘सेहत’ बिगाड़ने वाला प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के द्वार पर एक-दूसरे का हाथ थामकर लंबी मानव श्रृंखला बनाई और गगनभेदी नारेबाजी के साथ अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

RTI के आंकड़ों ने खोली पोल: 50% से अधिक पद खाली

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प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला ग्रामीण प्रधान नरपाल सिंह गुर्जर और शहरी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने सीधे तौर पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) से निकले उन आंकड़ों का हवाला दिया, जिन्होंने जिले के स्वास्थ्य ढांचे की चूलें हिला दी हैं। नेताओं ने बताया कि अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की 50 फीसदी से ज्यादा सीटें धूल फांक रही हैं।

नरपाल सिंह गुर्जर ने कहा, “जब अस्पताल के कमरों में डॉक्टर ही नहीं बैठेंगे, तो क्या दीवारें मरीजों का इलाज करेंगी? यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि औद्योगिक जिला होने के बावजूद यहाँ का गरीब आदमी सरकारी चौखट पर दम तोड़ रहा है और सरकार विज्ञापनों में नंबर-1 होने का दावा कर रही है।”

महंगे इलाज की मजबूरी और सरकारी बेरुखी

जिला शहरी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जानबूझकर सरकारी अस्पतालों को खोखला किया जा रहा है ताकि आम आदमी को मजबूरी में निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़े। उन्होंने कहा, “एक तरफ महंगाई की मार है और दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पतालों के भारी-भरकम बिल। गरीब व्यक्ति जाए तो जाए कहाँ? अगर यही हाल रहा तो सरकारी अस्पतालों पर ताले जड़ने की नौबत आ जाएगी।”

अल्टीमेटम: मांगें नहीं मानीं तो होगी भूख हड़ताल

प्रदर्शन के अंत में कांग्रेसी नेताओं ने मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। इस ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि खाली पड़े पदों को युद्ध स्तर पर नहीं भरा गया और स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर नहीं लाया गया, तो यह आंदोलन केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में जिले के विभिन्न हिस्सों में धरना-प्रदर्शन के साथ-साथ ‘आमरण अनशन’ और ‘भूख हड़ताल’ जैसे कड़े कदम भी उठाए जाएंगे।

अस्पताल परिसर में जुटी कार्यकर्ताओं की भीड़ और आम जनता के समर्थन को देखते हुए प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया। अब देखना यह है कि कांग्रेस के इस ‘अटैक’ के बाद सरकार स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों को भरने के लिए क्या मरहम लगाती है।

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