यमुनानगर। यमुनानगर में आज कुदरत और सिस्टम की मार ने अन्नदाता को खून के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया। तपती दोपहर और तेज हवाओं के बीच खेतों से गुजर रही हाई टेंशन बिजली की तारों में हुए शॉर्ट सर्किट ने भीषण आग का रूप ले लिया। पल भर में उठी चिंगारी ने सुनहरी हो चुकी गेहूं की फसल को काले धुएं के गुबार में बदल दिया। जब तक किसान और ग्रामीण कुछ समझ पाते, तेज हवा ने आग की लपटों को आसपास के खेतों में फैला दिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हवा के झोंकों ने भड़काई आग, ग्रामीणों ने दिखाया हौसला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के सैकड़ों ग्रामीण बाल्टियां और ट्रैक्टर लेकर मौके पर दौड़ पड़े। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत दमकल विभाग को सूचित किया गया। आग इतनी भयावह थी कि उस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। दमकल की तीन गाड़ियों ने मौके पर पहुँचकर मोर्चा संभाला और ग्रामीणों के साथ मिलकर कई घंटों की मशक्कत के बाद लपटों को आगे बढ़ने से रोका। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग पर नियंत्रण पा लिया गया, वरना सैकड़ों एकड़ फसल स्वाहा हो सकती थी।
बिजली विभाग के खिलाफ फूटा गुस्सा: ‘शिकायत दी, पर कार्रवाई नहीं हुई’
हादसे के बाद किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। खेतों के मालिकों का आरोप है कि जर्जर हो चुकी हाई टेंशन तारें उनके लिए हमेशा से खतरा बनी हुई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों को इन ढीली और नीचे झूलती तारों के बारे में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज उसी लापरवाही का नतीजा है कि किसानों की सालभर की कमाई और पशुओं के चारे के लिए रखा भूसा राख के ढेर में तब्दील हो गया।
पुलिस और प्रशासन की तफ्तीश शुरू
मौके पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों और फायर ब्रिगेड के अमले ने घटना का जायजा लिया। अधिकारियों ने माना कि यदि ग्रामीण और दमकल विभाग तत्परता न दिखाते, तो यह नुकसान करोड़ों में पहुँच सकता था। फिलहाल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या बिजली विभाग इन जर्जर तारों को दुरुस्त करने के लिए किसी और बड़े हादसे का इंतजार करेगा? किसान अब सरकार से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं ताकि वे इस आर्थिक झटके से उबर सकें।

