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Yamunanagar Farmers Protest: यमुनानगर में किसानों का महा-संग्राम: बायोमेट्रिक नीति के विरोध में 4 घंटे तक जाम रहा जिला सचिवालय रोड

AAmandeep Singh
यमुनानगर में किसानों का महा-संग्राम: बायोमेट्रिक नीति के विरोध में 4 घंटे तक जाम रहा जिला सचिवालय रोड
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यमुनानगर। यमुनानगर की मंडियों से आए किसानों की सबसे बड़ी शिकायत उस बायोमेट्रिक प्रणाली से है, जिसे सरकार पारदर्शिता का आधार मान रही है। किसान नेता जरनैल सिंह ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा, “सरकार एसी कमरों में बैठकर नियम तो बना देती है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि खेतों में दिन-रात मिट्टी और पानी में काम करने वाले किसान के अंगूठे के निशान अक्सर घिस जाते हैं। कई बार मशीन निशान नहीं पकड़ती, तो क्या किसान अपनी फसल घर वापस ले जाए?” उन्होंने आरोप लगाया कि पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने की अनिवार्यता और फिर तकनीकी खामियां किसानों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं।

कुदरत की मार और सिस्टम की बेरुखी

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प्रदर्शन के दौरान किसानों ने हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और प्राकृतिक आपदाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। किसान नेता सुभाष गुर्जर ने कहा कि एक तरफ कुदरत ने फसल तबाह कर दी, और दूसरी तरफ सरकार मुआवजे के नाम पर मौन साधे हुए है। उन्होंने कहा, “मंडियों में न तो फसल को ढकने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही उठान की सही व्यवस्था। ऊपर से नमी के नाम पर कट लगाकर किसान की कमर तोड़ी जा रही है।”

मंडियों में ‘कटौती’ के नाम पर खेल

धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने आरोप लगाया कि मंडियों में उन्हें हर मोड़ पर तकनीकी बहानों से उलझाया जा रहा है। कभी नमी (Moisture) का हवाला देकर दाम कम किए जाते हैं, तो कभी गेट पास और पोर्टल की विसंगतियों के नाम पर ट्रैक्टरों को घंटों कतार में खड़ा रखा जाता है। किसानों का कहना है कि जब तक यह जटिल बायोमेट्रिक सिस्टम वापस नहीं लिया जाता या इसमें ढील नहीं दी जाती, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।

सुरक्षा के कड़े पहरे में गूंजी नारेबाजी

प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला सचिवालय और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। चिलचिलाती धूप के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर 3 बजे जब जाम खुला, तो किसान नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 15 अप्रैल तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन केवल सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे प्रदेश में उग्र रूप दिया जाएगा।

फिलहाल, यमुनानगर के इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ और ‘जमीनी हकीकत’ के बीच की खाई को पाटना सरकार के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है।

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