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Municipal Corporation Yamunanagar: नरक जैसी जिंदगी: जगाधरी में नालियां जाम और सड़कों पर कचरा, मूंह ढंककर निकलने को मजबूर लोग

GGaganpreet Kaur
नरक जैसी जिंदगी: जगाधरी में नालियां जाम और सड़कों पर कचरा, मूंह ढंककर निकलने को मजबूर लोग
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यमुनानगर। जगाधरी शहर में इन दिनों सांस लेना भी सजा जैसा हो गया है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रहने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। रेलवे रोड, बस स्टैंड, मॉडल टाउन और जगाधरी वर्कशॉप जैसे प्रमुख क्षेत्रों में गंदगी के पहाड़ खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासी राजेश कुमार और सीमा अरोड़ा का कहना है कि सुबह घर से बाहर निकलते ही सड़ांध का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा बुरा हाल बच्चों और बुजुर्गों का है, जिन्हें इस दूषित वातावरण में सांस लेने की वजह से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का डर सता रहा है। चांदपुर इलाके में तो स्थिति और भी खराब है, जहां नाला जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर तालाब की तरह जमा हो गया है।

बाजारों से गायब हुए ग्राहक, दुकानदारों में रोष

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गंदगी का सीधा असर अब शहर के व्यापार पर भी दिखने लगा है। जगाधरी के बाजारों में कचरे के ढेरों के कारण लोग खरीदारी के लिए आने से कतरा रहे हैं। दुकानदार संजय गुप्ता बताते हैं कि दुकानों के बाहर फैली गंदगी और उठती बदबू के चलते ग्राहक बाजार में रुकना नहीं चाहते। यदि अगले कुछ दिनों में समाधान नहीं निकला, तो व्यापारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। कई जगहों पर कचरे के ढेर कम करने के लिए लोग और कुछ कर्मचारी उनमें आग लगा रहे हैं, जिससे उठने वाला जहरीला धुआं पर्यावरण और लोगों के फेफड़ों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा है।

स्वच्छ सर्वेक्षण: साख बचाने की चुनौती

नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चिंता स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 की रैंकिंग को लेकर है। पिछले साल देश भर में 47वां स्थान पाने वाले यमुनानगर-जगाधरी की साख इस बार दांव पर है। सर्वेक्षण की टीम किसी भी वक्त शहर का औचक निरीक्षण कर सकती है। जिन दीवारों पर पेंटिंग कर स्वच्छता का संदेश दिया गया था, आज उन्हीं के नीचे कचरे का ढेर लगा है। निगम अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं क्योंकि 550 टन कचरा उठाना अब किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। अगर जल्द ही हड़ताल खत्म नहीं हुई और युद्धस्तर पर सफाई नहीं की गई, तो इस बार रैंकिंग में शहर का पिछड़ना तय माना जा रहा है।

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