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Kalesar National Park Yamunanagar: हरियाणा के इस नेशनल पार्क में घूम रहे हैं 40 तेंदुए और हाथी, यमुनानगर डीएफओ ने वाहन चालकों को दी कड़ी हिदायत

GGaganpreet Kaur
हरियाणा के इस नेशनल पार्क में घूम रहे हैं 40 तेंदुए और हाथी, यमुनानगर डीएफओ ने वाहन चालकों को दी कड़ी हिदायत
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यमुनानगर। हिमाचल प्रदेश की सीमा और उत्तराखंड के कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे हरियाणा के इकलौते कलेसर नेशनल पार्क से एक बेहद सुखद तस्वीर सामने आई है। बीती रात गश्त के दौरान यमुनानगर के जिला वन अधिकारी (DFO) संदीप सैनी का सामना एक कद्दावर तेंदुए से हुआ। घने अंधकार के बीच तेंदुए की इस मौजूदगी को वन विभाग बेहद सकारात्मक मान रहा है। डीएफओ सैनी ने बताया कि तेंदुए का इस तरह मुख्य रास्तों के करीब दिखना यह साफ करता है कि कलेसर का इकोसिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित है और यहां वन्यजीवों के अनुकूल एक स्वस्थ वातावरण तैयार हो चुका है।

हाईवे पर सफर करने वाले जरा संभलकर चलें

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भौगोलिक दृष्टि से कलेसर नेशनल पार्क की बनावट ऐसी है कि यमुनानगर-पांवटा साहिब मुख्य मार्ग इसके बिल्कुल बीचों-बीच से होकर गुजरता है। इस वजह से हाथी, तेंदुए और सांभर जैसे भारी भरकम जंगली जानवर अक्सर भोजन और पानी की तलाश में सड़क पार करते रहते हैं। डीएफओ ने राहगीरों और वाहन चालकों से विशेष अनुरोध किया है कि यदि सफर के दौरान कोई वन्यजीव सड़क पर आ जाए, तो अपनी गाड़ी की रफ्तार धीमी कर लें। जानवर के बिल्कुल नजदीक गाड़ी ले जाने की भूल कतई न करें और न ही कौतूहल में आकर हेडलाइट चमकाएं या शोर मचाएं।

जानवर तभी हमला करता है जब उसे खतरा हो

अक्सर देखा जाता है कि सड़क पर वन्यजीवों को देखकर लोग लगातार हॉर्न बजाने लगते हैं, जो कि बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगली जानवर इंसानों पर सीधे कभी हमला नहीं करते। वे हिंसक सिर्फ उसी स्थिति में होते हैं, जब उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर कोई बड़ा खतरा या डर महसूस होता है। हॉर्न की तेज आवाज से वे भड़क सकते हैं। इसलिए सबसे बेहतर तरीका यही है कि वाहन को थोड़ी दूरी पर रोककर चुपचाप इंतजार किया जाए। कुछ ही पलों में ये जीव खुद-ब-खुद रास्ता छोड़कर वापस घने जंगल की ओर लौट जाते हैं।

110 साल बाद लौटा पुराना वैभव, पानी के लिए विशेष इंतजाम

कलेसर नेशनल पार्क का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 1913 के लंबे अरसे के बाद, साल 2023 में यहां पहली बार एक रॉयल बंगाल टाइगर देखा गया था, जो वन विभाग के फ्लैश एंड क्लिक कैमरों में ट्रैप हुआ था। करीब 110 साल बाद इस जंगल में बाघ, हाथी, तेंदुए, सांभर, खरगोश, अजगर और किंग कोबरा जैसे जीवों का कुनबा एक साथ फल-फूल रहा है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, इस समय पार्क में एक टाइगर के अलावा करीब 40 तेंदुए और 15 हाथियों का स्थाई डेरा है। वन विभाग ने चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए जंगल के अंदर वन्यजीवों के पीने के पानी के लिए जगह-जगह कृत्रिम तालाब और ओध (वॉटर होल्स) भी तैयार किए हैं।

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