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HBSE 12th Result: मजदूरी करने वाले की बेटी बनी प्रदेश की टॉपर, कामाक्षी ने बताया सफलता का सीक्रेट।

GGaganpreet Kaur
मजदूरी करने वाले की बेटी बनी प्रदेश की टॉपर, कामाक्षी ने बताया सफलता का सीक्रेट।
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यमुनानगर। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) के 12वीं के नतीजों ने यमुनानगर को जश्न मनाने का बड़ा मौका दिया है। जिले की कामाक्षी ने कॉमर्स संकाय में 500 में से 493 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान (Second Merit) झटक लिया है। कामाक्षी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता सुरेंद्र सिंह एक दिहाड़ी मजदूर हैं और माता वीना देवी गृहिणी। आर्थिक तंगहाली के बावजूद कामाक्षी ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। परिणाम घोषित होते ही कामाक्षी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और स्कूल से लेकर मोहल्ले तक बधाई देने वालों का तांता लग गया।

सोशल मीडिया से दूरी नहीं, सही तालमेल ने दिलाई कामयाबी

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अपनी पढ़ाई की रणनीति साझा करते हुए कामाक्षी ने बेहद परिपक्व बात कही। उन्होंने बताया कि आज के दौर में मोबाइल या सोशल मीडिया को पूरी तरह त्यागना समाधान नहीं है, बल्कि उसका सही इस्तेमाल जरूरी है। कामाक्षी के मुताबिक, उन्होंने पढ़ाई के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए मनोरंजन और शिक्षा के बीच तालमेल बिठाया। वे रोजाना 5 से 6 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं और कठिन विषयों के लिए सोशल मीडिया पर उपलब्ध एजुकेशनल कंटेंट की मदद लेती थीं। बिजनेस स्टडीज जैसे विषय में उन्होंने 100 में से पूरे 100 अंक हासिल किए हैं, जिसका श्रेय वे अपनी शिक्षिका चक्षू चड्ढा के मार्गदर्शन को देती हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला और सरकारी अफसर बनने का सपना

कामयाबी के इस शिखर पर पहुंचने के बाद कामाक्षी के कदम रुकने वाले नहीं हैं। उनका अगला लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में दाखिला लेना है। कामाक्षी भविष्य में इनकम टैक्स ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी रटने पर जोर नहीं दिया, बल्कि विषयों को गहराई से समझा। परीक्षा से पहले पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास और बार-बार रिवीजन ही उनकी सफलता की असली चाबी रही।

जिले का प्रदर्शन: पिछले सालों के मुकाबले सुधरा ग्राफ

यमुनानगर जिले के ओवरऑल प्रदर्शन की बात करें तो इस बार पास प्रतिशत 85.48 रहा, जो पिछले साल (84.21%) और उससे पिछले साल (85.12%) के मुकाबले बेहतर है। जिले ने प्रदेश की औसत दर (84.67%) को पछाड़ते हुए हरियाणा के 22 जिलों में 13वां स्थान प्राप्त किया है। जिले से कुल 9,759 छात्र परीक्षा में बैठे थे, जिनमें से 8,342 ने सफलता का स्वाद चखा। हालांकि, ओपन स्कूलिंग का परिणाम जिले के लिए अब भी चिंता का विषय है, जहाँ पास प्रतिशत महज 35.96% ही सिमट कर रह गया।

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