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Yamunanagar Khair Smuggling: यमुनानगर में खैर तस्करी का बड़ा खुलासा: घर में छिपा रखी थी 20 क्विंटल लकड़ी, 3 भाई गिरफ्तार

AAmandeep Singh
यमुनानगर में खैर तस्करी का बड़ा खुलासा: घर में छिपा रखी थी 20 क्विंटल लकड़ी, 3 भाई गिरफ्तार
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यमुनानगर। यमुनानगर के जाटोवाला गांव में वन संपदा की लूट का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। यहां एक ही छत के नीचे रहने वाले तीन सगे भाइयों ने अपने घर को ही खैर तस्करी का सुरक्षित ठिकाना बना रखा था। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने जब राकिब नाम के शख्स के घर पर दबिश दी, तो नजारा चौंकाने वाला था। घर के भीतर भारी मात्रा में प्रतिबंधित खैर की लकड़ी छिपाई गई थी। इस छापामार कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से राकिब, इरशाद और राहिल को रंगे हाथ दबोच लिया। यह तीनों भाई न केवल जंगलों से कीमती लकड़ी चोरी करते थे, बल्कि उसे ऊंचे दामों पर तस्करी करने के संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे।

20 क्विंटल लकड़ी बरामद, रिमांड पर खुलेगा राज

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तस्करों के कब्जे से बरामद की गई लकड़ी का वजन करीब 20 क्विंटल बताया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय बाजार में खैर की लकड़ी की भारी मांग है, जिसका इस्तेमाल कत्था बनाने और दवाइयों में होता है। जब्त की गई लकड़ी की कीमत लाखों रुपये में है। गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उन्हें रिमांड पर लिया है। जांच अधिकारियों का मानना है कि ये तीनों महज मोहरे हो सकते हैं और इनके पीछे कोई बड़ा ‘सफेदपोश’ तस्कर गिरोह सक्रिय हो सकता है जो पड़ोसी राज्यों तक लकड़ी की सप्लाई करता है।

एक्शन मोड में प्रशासन: एक हफ्ते में दूसरा बड़ा प्रहार

यमुनानगर और आसपास के शिवालिक बेल्ट में खैर तस्करों की सक्रियता पुरानी समस्या रही है, लेकिन हाल के दिनों में पुलिस की सख्ती ने इनके नेटवर्क को हिला कर रख दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा बड़ा मामला है। इससे पहले जगाधरी के एक गोदाम से भी भारी मात्रा में अवैध खैर बरामद की गई थी। लगातार हो रही इन रिकवरी से साफ है कि पुलिस अब केवल नाकों पर चेकिंग नहीं कर रही, बल्कि तस्करों के घर और गोदामों तक पहुंचकर उनके ‘सेफ हाउस’ को तबाह कर रही है।

जंगलों की सुरक्षा पर सवाल, जांच का दायरा बढ़ा

इतनी बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी गांव के भीतर पहुंच जाना वन विभाग की गश्त पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि इन भाइयों को जंगलों से लकड़ी काटने और लाने में किन स्थानीय लोगों या कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त था। रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में कई और बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल जाटोवाला गांव और आसपास के इलाकों में इस गिरफ्तारी के बाद हड़कंप मचा हुआ है और तस्करी से जुड़े अन्य संदिग्ध भूमिगत हो गए हैं।

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