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Mid Day Meal Workers Haryana Protest: मिड-डे मील वर्कर्स का हरियाणा सरकार को अल्टीमेटम: शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका, 4 अगस्त से कुरुक्षेत्र में पक्का पड़ाव

GGaganpreet Kaur
मिड-डे मील वर्कर्स का हरियाणा सरकार को अल्टीमेटम: शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका, 4 अगस्त से कुरुक्षेत्र में पक्का पड़ाव
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यमुनानगर (संजीव चौहान) हरियाणा के यमुनानगर में आज उस समय सियासी और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई, जब सैकड़ों की संख्या में मिड-डे मील वर्कर्स ने अनाज मंडी गेट पर इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सीटू से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जुटीं इन महिलाओं ने जिला उपप्रधान शिमला की अध्यक्षता में पहले एक जनसभा की और फिर जुलूस निकालते हुए जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर सूबे के शिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया। वर्कर्स का सीधा आरोप है कि इसी साल 12 जनवरी को पंचकुला में हुई राज्य स्तरीय रैली के बाद सरकार और शिक्षा विभाग ने जिन मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया था, उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

11 महीने काम और 10 महीने की तनख्वाह; 7 हजार के मानदेय में कैसे चले घर?

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मंच का संचालन कर रही राज्य सचिव शर्बती देवी और सीटू के वरिष्ठ पदाधिकारी सतपाल सैनी ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह योजना केंद्र सरकार की है, लेकिन पिछले 11 सालों से इसमें एक रुपया तक नहीं बढ़ाया गया है। वर्कर्स को महज 7000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, वह भी कई-कई महीनों तक अटक जाता है। नेताओं ने दर्द बयां करते हुए कहा, “हमसे स्कूलों में 11 महीने काम लिया जाता है, लेकिन मानदेय सिर्फ 10 महीने का मिलता है। क्या हमारे बच्चे एक महीने भूखे रहें? शिक्षकों की तर्ज पर हमें भी 12 महीने का पूरा वेतन मिलना चाहिए और हर महीने की 7 तारीख तक खाते में पैसा आ जाना चाहिए।”

4 अगस्त से कुरुक्षेत्र में डेरा और 10 अगस्त को ‘जेल भरो आंदोलन’ की चेतावनी

यूनियन ने सरकार को चेताते हुए अपने आगामी तीखे आंदोलन का पूरा रोडमैप जारी कर दिया है। राज्य सचिव शर्बती देवी ने एलान किया कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी। आगामी 4 अगस्त को मुख्यमंत्री के गृह जिले कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय महारैली की जाएगी और उसी दिन से मुख्यमंत्री आवास के सामने अनिश्चितकालीन पड़ाव डाल दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर सोई हुई सरकार नहीं जागी, तो 10 अगस्त को पूरे हरियाणा में जिला स्तर पर ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

₹30,000 वेतन और चिराग योजना के विरोध समेत रखीं ये प्रमुख मांगें:

न्यूनतम वेतन: महंगाई के आंकड़ों के मद्देनजर वर्कर्स को ₹30,000 न्यूनतम मासिक वेतन दिया जाए और इस सेवा को स्थाई (पक्का) किया जाए।

सेवानिवृत्ति लाभ: रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष तय हो और रिटायर होने पर एकमुश्त ₹2 लाख की आर्थिक सहायता मिले।

सुरक्षा चक्र: ड्यूटी के दौरान हादसे या मौत होने पर ₹5 लाख के मुआवजे का प्रावधान हो। साथ ही वर्दी के लिए सालाना ₹2000 दिए जाएं।

स्कूलों को बंद करने पर रोक: सरकार द्वारा चिराग योजना की आड़ में अब तक बंद किए जा चुके 5000 सरकारी प्राथमिक स्कूलों को दोबारा खोला जाए और स्कूलों को मर्ज करना बंद हो।

’30 साल से सेवा, पर रिटायरमेंट पर फूटी कौड़ी नहीं’— कड़ा रोष व्यक्त

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लगभग तीन दशकों से यह योजना चल रही है, लेकिन सालों तक बच्चों को खाना खिलाने वाली कुक जब रिटायर होती हैं, तो उन्हें खाली हाथ घर भेज दिया जाता है। इसके अलावा प्रदेश में 6 लाख के करीब बीपीएल कार्ड काटे जाने और भारी-भरकम बिजली बिलों ने इन गरीब वर्करों की कमर तोड़ दी है। आज के इस बड़े प्रदर्शन को रोशन लाल, मीनाक्षी, ऊषा, रेखा, प्रकाश कौर, चंद्र पाल, मालरा, माया, अनीता और बाला देवी सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया और सरकार को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि वे अपने हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगी।

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