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Yamunanagar Drug Bust: यमुनानगर में 70 साल का 'ड्रग कूरियर' गिरफ्तार: नेपाल से पंजाब ले जा रहा था 20 लाख की चरस

AAmandeep Singh
यमुनानगर में 70 साल का 'ड्रग कूरियर' गिरफ्तार: नेपाल से पंजाब ले जा रहा था 20 लाख की चरस
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यमुनानगर। अब्दुल मन्नान अंसारी का तस्करी करने का तरीका किसी पेशेवर अपराधी जैसा था। पुलिस की नजरों से बचने के लिए उसने सीधा रास्ता चुनने के बजाय कई ट्रेनें बदलीं। उसे लगा कि 70 साल की उम्र और शारीरिक लाचारी को देखकर कोई उस पर शक नहीं करेगा। पुलिस के मुताबिक, आरोपी नेपाल बॉर्डर से यह चरस लेकर पंजाब की ओर बढ़ रहा था। यमुनानगर पहुंचने पर वह भूख मिटाने के लिए ट्रेन से उतरकर स्टेशन के बाहर एक ढाबे पर खाना खाने गया। लेकिन शायद उसकी किस्मत ने साथ छोड़ दिया था।

मुखबिर की सूचना और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी

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जैसे ही अब्दुल खाना खाकर वापस स्टेशन की ओर बढ़ा, पुलिस के गुप्तचर को उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर शक हुआ। सूचना मिलते ही एंटी नारकोटिक्स सेल की टीम मौके पर पहुंची और उसे रोक लिया। बुजुर्ग की हालत देखकर एक बार तो पुलिस को भी यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब नियमों के तहत मजिस्ट्रेट को बुलाकर उसके सामान की तलाशी ली गई, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कपड़ों के बीच बड़ी ही चतुराई से 5 किलो चरस छिपाई गई थी।

पुराना ‘खिलाड़ी’ है अब्दुल: कानपुर में भी कटा चुका है जेल

शुरुआती पूछताछ में जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस को भी चौंका दिया। यह पहली बार नहीं था जब अब्दुल कानून के हत्थे चढ़ा हो। उसने कबूला कि इससे पहले उसे कानपुर पुलिस ने 9 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया था। उस मामले में वह कुछ समय पहले ही जमानत पर बाहर आया था। बाहर आते ही उसने फिर से मौत के इस व्यापार में कदम रख दिया।

रिमांड के दौरान खुलेंगे बड़े राज

यमुनानगर पुलिस अब अब्दुल को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उस ‘नेटवर्क’ तक पहुंचना है, जिसके लिए अब्दुल एक ‘कूरियर’ के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि नेपाल बॉर्डर पर उसे यह सप्लाई किसने दी और पंजाब में इसे किसे सौंपा जाना था।

70 साल की उम्र, जिसमें लोग अक्सर आध्यात्म या परिवार के साथ समय बिताते हैं, वहां अब्दुल का सलाखों के पीछे पहुंचना समाज और कानून-व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक पहलू है। फिलहाल, 20 लाख रुपये की चरस पुलिस के कब्जे में है और आरोपी सलाखों के पीछे।

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