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Yamunanagar Road Accident: यमुनानगर में भीषण सड़क हादसा: अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे पूर्व सरपंच के इकलौते बेटे की थार से टक्कर में मौत

GGaganpreet Kaur
यमुनानगर में भीषण सड़क हादसा: अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे पूर्व सरपंच के इकलौते बेटे की थार से टक्कर में मौत
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यमुनानगर। दो महीने पहले जिस घर में अमेरिका से बेटे के सुरक्षित लौटने की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां शनिवार की काली रात एक ऐसा कहर बनकर टूटी जिसने हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया। सढौरा क्षेत्र के असगरपुर गांव के पास शनिवार देर रात करीब साढे़ ११ बजे एक रोंगटे खड़े कर देने वाले सड़क हादसे में २५ साल के रितिक की मौत हो गई। वह लाहड़पुर गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र कुमार का इकलौता बेटा था। इस हादसे ने न केवल एक मां-बाप से उनका बुढ़ापे का सहारा छीन लिया, बल्कि दो राज्यों के तीन अन्य परिवारों को भी अस्पताल के कमरों में लाकर खड़ा कर दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो के सारे एयरबैग्स खुल गए और गाड़ी सड़क पर कई पलटियां खाते हुए पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो गई। वहीं दूसरी तरफ, टक्कर मारने वाली थार गाड़ी का वेग इतना तेज था कि उसके एक तरफ के दोनों टायर रिम सहित फट गए और वह सड़क किनारे जाकर रुकी।

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पंचकूला के दोस्तों के साथ घूमने निकला था रितिक

हादसे में बाल-बाल बचे और अस्पताल में उपचाराधीन रितिक के चचेरे भाई ललित सैनी ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शनिवार रात करीब साढे़ आठ बजे रितिक के पास पंचकूला के प्यारेवाला गांव से उसके दोस्त रजत और हर्ष काले रंग की स्कॉर्पियो लेकर आए थे। रितिक ने ललित को भी साथ चलने को कहा। चारों दोस्त गाड़ी में सवार होकर पहले रसूलपुर गए और फिर वहां से कालाआंब की तरफ निकले। उस वक्त स्कॉर्पियो की स्टीयरिंग खुद रितिक के हाथों में थी, जबकि ललित उसके साथ अगली सीट पर बैठा था।

उत्तराखंड नंबर की थार ने सामने से मारी टक्कर

ललित ने बताया कि जब उनकी गाड़ी असगरपुर गांव से थोड़ा आगे बढ़ी, तो सामने (कालाआंब) की तरफ से आ रही एक काले रंग की थार (उत्तराखंड नंबर) के चालक ने लापरवाही और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए उनकी स्कॉर्पियो को सीधी टक्कर मार दी। इस जबरदस्त टक्कर के बाद चीख-पुकार मच गई। रितिक, रजत और हर्ष को सिर और छाती में गंभीर चोटें आईं और वे मौके पर ही बेहोश हो गए।

वहां से गुजर रहे राहगीरों ने तुरंत मानवता दिखाते हुए पुलिस की डायल-११२ सेवा को सूचित किया। मौके पर पहुंची एम्बुलेंस ने चारों को सढौरा के सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत जगाधरी सिविल अस्पताल रेफर कर दिया।

दो दोस्त मोहाली के फोर्टिस तो दो मुलाना में भर्ती

जगाधरी पहुंचने पर भी जब घायलों की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो रितिक और ललित के परिजन उन्हें तुरंत अंबाला के एमएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मुलाना) ले गए। वहीं पंचकूला के रहने वाले रजत और हर्ष की गंभीर स्थिति को देखते हुए उनके परिवार वाले उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल ले गए, जहां वे दोनों अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। मुलाना अस्पताल में डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार को रितिक ने दम तोड़ दिया, जबकि ललित का इलाज जारी है।

‘डोंकी’ के रास्ते गया था अमेरिका, दो महीने पहले ही लौटा था वतन

लाहड़पुर गांव के लोगों ने रुआंसे गले से बताया कि रितिक बेहद मिलनसार युवक था। करीब ढाई साल पहले वह करोड़ों रुपये खर्च कर बेहद खतरनाक ‘डोंकी’ (अवैध अप्रवासन) के रास्ते अमेरिका पहुंचा था। वहां वह काफी समय तक ट्रक चलाता रहा। लेकिन करीब दो महीने पहले अमेरिकी प्रशासन ने उसे डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया था। घरवाले इस बात से संतुष्ट थे कि बेटा भले ही वापस आ गया, लेकिन उनकी आंखों के सामने सुरक्षित है। पर नियति के क्रूर खेल को कुछ और ही मंजूर था।

सढौरा थाना पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल ललित सैनी के बयानों के आधार पर अज्ञात थार चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और मौत का कारण बनने (IPC की विभिन्न धाराओं) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि थार के नंबर प्लेट के जरिए आरोपी चालक की तलाश की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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