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Aja Ekadashi: 7 या 8 सितंबर? जानिए अजा एकादशी व्रत की सही तारीख और पारण का समय

Aja Ekadashi: 7 या 8 सितंबर? जानिए अजा एकादशी व्रत की सही तारीख और पारण का समय

7 या 8 सितंबर? जानिए अजा एकादशी

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GGaganpreet Kaur

Aja Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथियां जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती हैं। भाद्रपद (भादो) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘अजा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अजा एकादशी की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच 7 और 8 सितंबर को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषीय पंचांग और उदया तिथि के सिद्धांतों के आधार पर आइए समझते हैं कि व्रत किस दिन रखा जाएगा और पूजा की सही विधि क्या है।

7 या 8 सितंबर—कब रखें अजा एकादशी का व्रत?

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पंचांगीय गणना के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 6 सितंबर 2026 की शाम से हो रहा है, जो 7 सितंबर को दोपहर तक व्याप्त रहेगी। शास्त्रों में व्रत-त्योहारों के लिए ‘उदया तिथि’ (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) को ही सर्वमान्य माना गया है।

इस नियम के तहत अजा एकादशी का व्रत सोमवार, 7 सितंबर 2026 को ही रखा जाएगा। 8 सितंबर को एकादशी तिथि समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए उस दिन व्रत नहीं रखा जाएगा बल्कि विधिवत पारण (व्रत खोलना) किया जाएगा।

पौराणिक महत्व: क्यों खास है अजा एकादशी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत करने से साधक को जाने-अनजाने में हुए समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि पौराणिक काल में राजा हरिश्चंद्र ने भी अपना खोया हुआ राज्य और परिवार वापस पाने के लिए महर्षि गौतम के सुझाव पर अजा एकादशी का विधानपूर्वक व्रत किया था। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-शांति आती है।

अजा एकादशी पूजा विधि

संकल्प और स्नान: व्रत के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करें और स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करके भगवान श्रीहरि के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर में या एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। देसी घी का दीपक और धूप जलाएं।

अर्पण और तुलसी का महत्व: भगवान विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन, मौसमी फल और पंचामृत अर्पित करें। विष्णु जी की पूजा बिना तुलसी दल के अधूरी मानी जाती है, इसलिए उन्हें तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं।

मंत्र और पाठ: पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या अजा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। अंत में आरती कर भोग लगाएं।

दान-पुण्य: संध्या समय पुनः आरती करें और अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र व फल दान करें।

व्रत पारण का समय

अजा एकादशी व्रत का पारण मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को सुबह किया जाएगा। पारण के दिन प्रातःकाल स्नान-पूजा के बाद ब्राह्मणों या गरीबों को दान-दक्षिणा देकर ही सात्विक भोजन से व्रत खोलें। ध्यान रहे कि अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के समय में आंशिक अंतर होने के कारण स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण समय में कुछ मिनटों का फेरबदल हो सकता है।

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