Amritsar Golden Temple: पंजाब के अमृतसर में सोमवार को चौथे सिख गुरु श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष धार्मिक रौनक देखने को मिली। गुरु साहिब के प्रकाश पर्व पर पवित्र परिसर में हेलीकॉप्टर से फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं। फूलों की वर्षा के दौरान संगत ने भक्ति भाव से इस दृश्य को देखा और गुरु घर में माथा टेककर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
प्रकाश पर्व के अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे। श्री हरिमंदिर साहिब में सुबह से ही संगत की आवाजाही रही। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान किया, गुरबाणी कीर्तन सुना और गुरु साहिब के सामने नतमस्तक होकर परिवारों की सुख-समृद्धि, शांति और सभी के कल्याण के लिए अरदास की। इस दौरान धार्मिक माहौल बना रहा और गुरु घर में पहुंची संगत ने गुरु रामदास जी के जीवन, उनकी शिक्षाओं और सेवा की परंपरा को याद किया। प्रकाश पर्व सिख समुदाय के लिए आध्यात्मिक महत्व रखने वाला अवसर है। इस दिन श्रद्धालु गुरु साहिब के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने के साथ उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प भी लेते हैं। अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब के आसपास धार्मिक गतिविधियों और संगत की मौजूदगी से उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।
श्री हरिमंदिर साहिब में हेलीकॉप्टर से बरसाए फूल, संगत ने भक्ति भाव से देखे दर्शन
प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में हेलीकॉप्टर से फूलों की पंखुड़ियां बरसाना आयोजन का खास आकर्षण रहा। आसमान से बरसती फूलों की पंखुड़ियों ने पवित्र परिसर की सुंदरता को और बढ़ा दिया। वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को गुरु साहिब के प्रकाश पर्व की खुशियों से जोड़कर देखा और पूरे श्रद्धा भाव से गुरु घर में माथा टेका। श्री हरिमंदिर साहिब सिख धर्म का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। यहां रोजाना देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रकाश पर्व और गुरुपर्व जैसे विशेष अवसरों पर यहां धार्मिक गतिविधियों की रौनक और बढ़ जाती है। गुरबाणी कीर्तन, अरदास और सरोवर में स्नान के लिए पहुंचने वाली संगत इस स्थान से जुड़ी आस्था और परंपराओं को दर्शाती है।
श्रद्धालुओं के लिए श्री हरिमंदिर साहिब में दर्शन केवल धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं हैं। संगत गुरु घर में पहुंचकर गुरबाणी सुनती है, सेवा में भाग लेती है और आध्यात्मिक शांति की कामना करती है। प्रकाश पर्व पर भी श्रद्धालुओं ने गुरु रामदास जी को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
सरोवर में स्नान, गुरबाणी कीर्तन और अरदास में शामिल हुई संगत
गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान किया और गुरबाणी कीर्तन सुना। संगत ने गुरु घर में माथा टेककर अपने परिवारों और समाज की सुख-शांति के लिए अरदास की। धार्मिक आयोजन के दौरान भक्ति और सेवा का भाव प्रमुख रहा। सिख धर्म में गुरबाणी और कीर्तन का विशेष स्थान है। गुरबाणी के माध्यम से गुरु साहिबों की शिक्षाओं, मानवता और प्रभु भक्ति का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचता है। प्रकाश पर्व के अवसर पर संगत ने इन शिक्षाओं को याद किया और गुरु रामदास जी के जीवन से प्रेरणा लेने की भावना व्यक्त की। अमृतसर में ऐसे धार्मिक अवसरों का प्रभाव केवल श्री हरिमंदिर साहिब परिसर तक सीमित नहीं रहता। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण गुरु नगरी में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे लोग एक साथ दर्शन करते हैं, गुरबाणी सुनते हैं और गुरु घर की परंपराओं से जुड़ते हैं। इससे सिख धर्म की आध्यात्मिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता की झलक मिलती है।
लंगर और सेवा से सामने आया समानता और मानवता का संदेश
श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर गुरु घर की परंपराओं में सेवा और लंगर का महत्व भी विशेष रूप से दिखाई देता है। सिख धर्म में लंगर की व्यवस्था सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के एक साथ भोजन कराने की भावना से जुड़ी है। इसमें जाति, वर्ग, भाषा या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेद नहीं किया जाता। यह परंपरा समानता और मानवता का संदेश देती है। सेवा सिख जीवन पद्धति का अहम हिस्सा है। गुरु घर में श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग सेवाओं में भाग लेते हैं। सेवा के जरिए दूसरों की मदद करने, विनम्रता अपनाने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की सीख मिलती है। प्रकाश पर्व जैसे अवसरों पर इन परंपराओं का महत्व और अधिक महसूस किया जाता है, क्योंकि संगत गुरु साहिब की शिक्षाओं को याद करने के साथ उन्हें अपने व्यवहार में उतारने की प्रेरणा भी लेती है।
गुरु रामदास जी का जीवन भी सेवा, विनम्रता, मानवता और प्रभु भक्ति से जुड़ा रहा है। उनके प्रकाश पर्व पर श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब के प्रति आस्था प्रकट की और सभी के जीवन में सुख-शांति की कामना की। धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर सिख परंपरा में सेवा और सामूहिक सहभागिता के महत्व को सामने रखा।
अमृतसर शहर की स्थापना से जुड़ा है गुरु रामदास जी का नाम
श्री गुरु रामदास जी सिखों के चौथे गुरु थे। उनका नाम अमृतसर शहर की स्थापना से जुड़ा है। गुरु रामदास जी ने इस क्षेत्र को बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ अमृतसर सिख धर्म की आस्था, धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र बन गया। आज यह शहर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बसे सिख समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। अमृतसर की पहचान श्री हरिमंदिर साहिब से भी जुड़ी हुई है। यह पवित्र स्थल सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल है और यहां श्रद्धालु साल भर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर यहां पहुंचने वाली संगत गुरु साहिब के योगदान को याद करती है और उनकी शिक्षाओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट करती है।
गुरु रामदास जी की शिक्षाएं विनम्रता, सेवा, मानवता और ईश्वर के प्रति समर्पण पर जोर देती हैं। उनका जीवन लोगों को आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर दूसरों की मदद करने और समाज में सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। प्रकाश पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं ने इन्हीं मूल्यों को याद करते हुए गुरु साहिब के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। अमृतसर में मनाया गया यह प्रकाश पर्व धार्मिक आस्था के साथ सिख परंपराओं और गुरु घर की सेवा भावना को याद करने का अवसर भी रहा। श्री हरिमंदिर साहिब में फूलों की वर्षा, गुरबाणी कीर्तन, अरदास और संगत की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। श्रद्धालुओं ने गुरु रामदास जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए सभी के कल्याण और सुख-शांति की कामना की।

