Ambala News: अंबाला इमारत हादसे में आरोपियों को राहत, 6 मजदूरों की मौत के मामले में कोर्ट ने 6 अक्टूबर तक गिरफ्तारी पर लगाई रोक
अंबाला इमारत हादसे में आरोपियों को राहत
Ambala News: हरियाणा के अंबाला छावनी से सटे धूलकोट इलाके की वीटा कॉलोनी में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के मुख्य आरोपियों को अदालत से फिलहाल राहत मिल गई है। 27 सितंबर को निर्माणाधीन 3 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग गिरने से हुई 6 मजदूरों की मौत के मामले में आरोपी हरदीप सिंह जग्गी और अन्य की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर अंबाला कोर्ट में सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक आरोपियों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 6 अक्टूबर 2026 को होगी।
कोर्ट ने सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, पुरानी अर्जियों का मांगा ब्योरा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे इस हादसे में नामजद अन्य आरोपियों और उनकी जमानत याचिकाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या इस मामले में आरोपियों की तरफ से पहले भी कोई जमानत अर्जी दाखिल की गई थी या नहीं। अदालत के इस आदेश के बाद 6 अक्टूबर तक पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी।
तीसरी मंजिल पर लैंटर डालते समय ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी इमारत
यह भीषण हादसा 27 सितंबर की दोपहर करीब 3 बजे धूलकोट स्थित वीटा कॉलोनी में हुआ था। लगभग 1200 वर्ग गज के विशाल भूखंड पर 3 मंजिला कमर्शियल इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के वक्त करीब 15 से 17 मजदूर तीसरी मंजिल पर कंक्रीट का लैंटर डालने के काम में जुटे हुए थे, जबकि कई मजदूर नीचे की मंजिलों पर चिनाई और अन्य कामों में लगे थे। इसी दौरान अचानक इमारत का पिछला हिस्सा भरभराकर ढह गया और देखते ही देखते पूरी तीन मंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई।
मलबे में दबने से हुई थी 6 की मौत, कई ने कूदकर बचाई थी जान
इमारत ढहते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लेंटर ढहने की कड़ाकेदार आवाज सुनते ही ऊपरी मंजिल पर काम कर रहे कुछ मजदूरों ने मुस्तैदी दिखाते हुए आसपास की छतों और खुले स्थान पर छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली। हालांकि, कई मजदूर मलबे के भारी-भरकम पत्थरों और सरियों के नीचे सीधे दब गए। लंबे चले राहत एवं बचाव कार्य के बाद मलबे से 6 मजदूरों के शव निकाले गए थे। इस हादसे ने निर्माण मानकों और पुलिस प्रशासन की जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिस पर अब सभी की निगाहें 6 अक्टूबर को होने वाली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं।
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