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Ambala News: नारायणगढ़ मॉडल स्कूल की मनमानी, CBSE 10वीं में कंपार्टमेंट आई तो 39 छात्रों को स्कूल से निकाला!

AAmandeep Singh
Ambala News: नारायणगढ़ मॉडल स्कूल की मनमानी, CBSE 10वीं में कंपार्टमेंट आई तो 39 छात्रों को स्कूल से निकाला!

नारायणगढ़ मॉडल स्कूल की मनमानी, CBSE 10वीं में कंपार्टमेंट आई तो 39 छात्रों को स्कूल से निकाला!

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Ambala News: हरियाणा के सरकारी और मॉडल स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के जितने भी लंबे-चौड़े दावे किए जाएं, लेकिन धरातल पर कड़वी सच्चाई अक्सर अलग ही कहानी बयां करती है।

अंबाला के नारायणगढ़ स्थित मॉडल स्कूल का एक ऐसा ही मामला चर्चा में है, जहां सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को संबल देने के बजाय उन्हें स्कूल से ही बेदखल कर दिया गया। आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने अपना शत-प्रतिशत रिपोर्ट कार्ड चमकाने की होड़ में 39 विद्यार्थियों को बाहर का रास्ता थमा दिया, जिससे अब इन बच्चों के भविष्य पर असमंजस का काला साया मंडरा रहा है।

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39 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट और 42 दिन का अनिश्चितता भरा दौर

जानकारी के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र में नारायणगढ़ मॉडल स्कूल से 10वीं कक्षा के कुल 104 विद्यार्थियों ने सीबीएसई की परीक्षा दी थी। नतीजे आए तो गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों में 39 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट आ गई। परीक्षा परिणाम आते ही स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच तनातनी शुरू हो गई।

आरोप है कि प्रबंधन ने इन बच्चों को आगे की कक्षाओं में बैठने या 11वीं में अस्थायी दाखिला देने से साफ मना कर दिया और कई विद्यार्थियों के स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) काटकर उनके हाथ में थमा दिए। करीब 42 दिन के इंतजार के बाद जब कंपार्टमेंट परीक्षा हुई और उसमें से 9 विद्यार्थियों ने सफलता भी हासिल कर ली, तब भी स्कूल ने उन्हें दोबारा अपने यहां दाखिला देने से हाथ खड़े कर दिए।

इंग्लिश मीडियम छोड़ 7 किमी दूर हिंदी माध्यम में पढ़ने को मजबूर छात्र

स्कूल प्रशासन के इस अड़ियल रवैये के कारण विद्यार्थियों और उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब इन बच्चों को अपने घर से करीब 5 से 7 किलोमीटर दूर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) से संबद्ध हिंदी माध्यम के स्कूलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जो छात्र शुरुआत से सीबीएसई पैटर्न और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते आए थे, उनके लिए अचानक भाषा और बोर्ड बदलना न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला है, बल्कि उनकी पढ़ाई की पूरी नीव हिला रहा है।

नियमों की आड़ या अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश?

अभिभावकों का सीधा आरोप है कि स्कूल ने शिक्षकों की पढ़ाई में नाकामी को छिपाने और स्कूल के ओवरऑल रिजल्ट को खराब होने से बचाने के लिए यह पैंतरा आजमाया है। वहीं दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन अपने बचाव में सीबीएसई (CBSE) के कड़े नियमों और शर्तों का हवाला दे रहा है। स्कूल का तर्क है कि कंपार्टमेंट श्रेणी के विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोमोट या री-एडमिशन देने के लिए निर्धारित मापदंडों का पालन करना अनिवार्य है।

शिक्षा विभाग हरकत में: डीईओ ने दिए जांच के निर्देश

मामले के तूल पकड़ते ही जिला शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में यह बात सामने आती है कि स्कूल ने अपनी परफॉर्मेंस सुधारने या रैंकिंग चमकाने की नीयत से यह कदम उठाया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों व स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। डीईओ ने पीड़ित अभिभावकों को खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) या सीधे जिला मुख्यालय में आकर मिलने का आश्वासन दिया है।

भविष्य पर लटकी तलवार, कब मिलेगा न्याय?

नारायणगढ़ का यह मामला केवल एक स्कूल की प्रशासनिक मनमानी का नहीं, बल्कि उन दर्जनों विद्यार्थियों की जिंदगी से जुड़ा है जो व्यवस्था की इस खींचतान में पिस रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग नियमों की अपनी व्याख्या से परे हटकर इन बच्चों को उसी स्कूल में वापस दाखिला दिला पाता है या वे व्यवस्था के इस अन्यायी रवैये का शिकार बने रहेंगे।

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