Bahadurgarh News: बहादुरगढ़ में विधायक राजेश जून के दफ्तर पर हंगामा, हड़ताली सफाईकर्मियों से छीना माइक, बहस के बाद बिना ज्ञापन लौटे कर्मचारी

बहादुरगढ़ में विधायक राजेश जून के दफ्तर पर हंगामा, हड़ताली सफाईकर्मियों से छीना माइक, बहस के बाद बिना ज्ञापन लौटे कर्मचारी
Bahadurgarh News: हरियाणा में बीते कई दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल का असर अब जनप्रतिनिधियों की चौखट तक पहुंच गया है। शुक्रवार को बहादुरगढ़ में निर्दलीय विधायक राजेश जून के कार्यालय पर माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब मांग पत्र लेकर पहुंचे सफाईकर्मियों की विधायक से सीधे कहासुनी हो गई। बहस के दौरान सफाई कर्मचारी संघ के प्रधान राजेंद्र ने माइक संभालते हुए कह दिया, “आप भाजपा की भाषा मत बोलिए। आपने भाजपा को समर्थन दिया है, जबकि वोट तो हमने भी उन्हें दिए हैं।”
यूनियन नेता की इस बात पर विधायक राजेश जून आपा खो बैठे और उन्होंने सीधे हाथ बढ़ाकर उनके से माइक छीन लिया। जब कर्मचारियों ने इस पर ऐतराज जताया तो विधायक ने कड़े लहजे में कहा, “जिला प्रधान हो तो क्या, हम किसी चीज के प्रधान नहीं हैं क्या? फांसी तोड़ेगा क्या? पूरी बहादुरगढ़ की जनता को तुम लोगों ने परेशान कर रखा है।” मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए दोनों पक्षों को अलग किया, जिसके बाद आक्रोशित सफाई कर्मचारी विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बिना ज्ञापन दिए ही वहां से वापस लौट गए।
‘जनता की कीमत पर हड़ताल बर्दाश्त नहीं’: विधायक ने रखा अपना पक्ष
घटना के बाद उठे विवाद पर सफाई देते हुए निर्दलीय विधायक राजेश जून ने कहा कि वे कर्मचारियों की वाजिब मांगों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से आए दिन हड़ताल की जाती है, वह तरीका बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा, “मेरे महज 22 महीने के कार्यकाल में ही सफाई कर्मचारी लगभग छह बार हड़ताल पर जा चुके हैं।
इससे सीधे तौर पर शहरवासी पिस रहे हैं और जगह-जगह गंदगी के ढेर लग रहे हैं।” विधायक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पिछले विधानसभा सत्र में भी सफाई कर्मचारियों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था और आगामी सत्र में भी सरकार के समक्ष उनकी आवाज उठाएंगे, लेकिन व्यवस्था ठप करके जनता को बंधक बनाना सही नहीं है।
कर्मचारियों की दलील: ’13 मई का समझौता तोड़ा, सरकार पर दबाव बनाने की मजबूरी’
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के अड़ियल रवैये के कारण उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कर्मचारी नेता राजेश ने बताया कि 13 मई को प्रदेश सरकार के साथ उनकी मांगों को लेकर बाकायदा लिखित समझौता हुआ था, लेकिन सरकार अपने वादों से मुकर गई।
इसी के विरोध में रणनीति के तहत हरियाणा के सभी 90 विधायकों और 10 सांसदों को मांग पत्र सौंपकर विधानसभा में आवाज उठाने की अपील की जा रही है। कर्मचारियों ने साफ कहा कि उनकी मांगें कोई बहुत बड़ी नहीं हैं; यदि सरकार समझौते को लागू कर देती है, तो वे महज 48 घंटे (दो दिन) के भीतर पूरे शहर की सफाई करके व्यवस्था चकाचक कर देंगे।
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