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कोटा अस्पताल में 4 प्रसूताओं की मौत का मामला: स्वास्थ्य मंत्री ने जताई अनिश्चितता, बोले-हमारे पास जवाब नहीं, ये एक पहेली

VVinita Kohli
कोटा अस्पताल में 4 प्रसूताओं की मौत का मामला: स्वास्थ्य मंत्री ने जताई अनिश्चितता, बोले-हमारे पास जवाब नहीं, ये एक पहेली
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कोटा: राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत और आठ अन्य महिलाओं की हालत बिगड़ने का मामला गंभीर होता जा रहा है। यह घटना चिकित्सा विभाग के लिए अब तक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। घटना के करीब नौ दिन बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कोटा पहुंचे, जहां उन्होंने अस्पतालों का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ बैठक की। मंत्री ने इस पूरे मामले पर कहा कि अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है और यह स्थिति “पहेली” जैसी है।

कोटा दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्वीकार किया कि इस तरह का मामला उनके कार्यकाल में पहले कभी सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि संभवतः ब्लड स्ट्रीम में किसी प्रकार का रिएक्शन हुआ हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मंत्री ने कहा कि वास्तविक कारण का पता ड्रग और मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के पास भी इस घटना का कोई निश्चित जवाब नहीं है। इस बयान के बाद मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में और गंभीरता बढ़ गई है।

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कोटा मेडिकल कॉलेज में 170 मिनट तक निरीक्षण

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर गुरुवार दोपहर करीब 1:40 बजे कोटा मेडिकल कॉलेज पहुंचे और लगभग 170 मिनट तक यहां रुके। इस दौरान उन्होंने न्यू मेडिकल हॉस्पिटल, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) और जेके लोन हॉस्पिटल का निरीक्षण किया।

इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक की और अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों की सुविधाओं और चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी ली। बाद में मीडिया से बातचीत कर वे शाम करीब 4:30 बजे कोटा से रवाना हो गए।

सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की तुलना

मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री खींवसर ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की सराहना की और उन्हें प्राइवेट अस्पतालों से बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि जब किसी मरीज की हालत प्राइवेट अस्पताल में बिगड़ती है, तो लोग उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों की ओर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई निजी अस्पताल लाभ के उद्देश्य से काम करते हैं और कई मामलों में सामान्य प्रसव को भी सिजेरियन में बदल दिया जाता है, जबकि सरकारी अस्पतालों में ऐसा नहीं होता। मंत्री ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन मामलों की संख्या अधिक होना जनता के भरोसे का संकेत है।

ड्रग टेस्टिंग पर टिकी जांच की दिशा

स्वास्थ्य विभाग अब इस पूरे मामले की जांच में ड्रग और मेडिकल रिपोर्ट को सबसे महत्वपूर्ण मान रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी दवा या मेडिकल प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विशेषज्ञ टीम मरीजों के उपचार से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दवाओं की जांच कर रही है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही सतर्क हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

घटना के बाद से मरीजों के परिजनों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। परिजन लगातार इस बात का जवाब मांग रहे हैं कि आखिर एक साथ कई महिलाओं की तबीयत कैसे बिगड़ी। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। कोटा मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी बढ़ाया गया है।

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