दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (CBSE) ने शिक्षा नीति में बड़े बदलाव को जमीन पर उतारते हुए 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा की डेटशीट फाइनल कर दी है। नई दिल्ली स्थित बोर्ड मुख्यालय से जारी सूचना के मुताबिक, यह परीक्षाएं 15 मई से शुरू होकर 21 मई तक संचालित की जाएंगी। यह कदम उन लाखों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें लगता था कि मुख्य परीक्षा में किसी वजह से वे अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए।
ऐच्छिक होगी परीक्षा, नहीं रहेगा कोई दबाव
बोर्ड ने साफ कर दिया है कि मई में होने वाली यह दूसरी परीक्षा पूरी तरह से वैकल्पिक (Optional) है। यानी, अगर कोई विद्यार्थी अपनी पहली परीक्षा के नतीजों से खुश है, तो उसे दोबारा एग्जाम हॉल में बैठने की कोई जरूरत नहीं है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच से बोर्ड का डर खत्म करना और उन्हें ‘वन-शॉट’ एग्जाम के तनाव से मुक्त करना है। सीबीएसई के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल लगभग 24.83 लाख विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से अधिकांश ने पहली परीक्षा दी है। अब अंकों के गणित को बेहतर करने के लिए बोर्ड ने यह दूसरा रास्ता खोल दिया है।
परीक्षा का समय और जरूरी गाइडलाइंस
शेड्यूल के अनुसार, ज्यादातर विषयों के पेपर सुबह 10:30 बजे शुरू होंगे और दोपहर 1:30 बजे तक चलेंगे। हालांकि, कुछ छोटे विषयों के लिए समय सीमा दोपहर 12:30 बजे तक ही रखी गई है। बोर्ड ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड के बिना प्रवेश नहीं मिलेगा। साथ ही, परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय से कम से कम आधे घंटे पहले केंद्र पर पहुंचें ताकि अंतिम समय की अफरा-तफरी से बचा जा सके।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का आगाज
विशेषज्ञों का मानना है कि साल में दो बार परीक्षा कराने का यह प्रयोग भविष्य में कोचिंग कल्चर और रटने की प्रवृत्ति को कम करेगा। इससे छात्रों को अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। इस साल की परीक्षा के लिए बोर्ड ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है ताकि रिजल्ट प्रोसेसिंग में भी कोई देरी न हो और छात्रों का अगला शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।

