September 24, 2026

साइबर ठगी की रकम पर अब तुरंत लगेगा होल्ड, चंडीगढ़ पुलिस-बैंकों ने बनाई तेज कार्रवाई की रणनीति

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साइबर ठगी की रकम पर अब तुरंत लगेगा होल्ड, चंडीगढ़ पुलिस-बैंकों ने बनाई तेज कार्रवाई की रणनीति

साइबर ठगी की रकम पर अब तुरंत लगेगा होल्ड

Chandigarh Cyber Fraud: साइबर ठगी में लोगों के खाते से रकम निकलने के बाद उसे वापस लाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी चुनौती से निपटने और ठगी की रकम को समय रहते दूसरे खातों में जाने से रोकने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने बैंकों के साथ समन्वय मजबूत करने की कवायद शुरू की है। इसी कड़ी में पुलिस और विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों के नोडल अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें फ्रॉड की रकम पर तत्काल होल्ड या लियन लगाने और जरूरी बैंकिंग जानकारी बिना देरी साझा करने पर खास जोर दिया गया। बैठक में निवेश के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई और क्यूआर कोड फ्रॉड, फिशिंग, फर्जी कस्टमर केयर और म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि साइबर ठगी में शुरुआती कुछ समय बेहद अहम होता है। रकम जितनी जल्दी फ्रीज होगी, उसके आगे ट्रांसफर होने की संभावना उतनी ही कम होगी।

बैठक में पुलिस की ओर से भेजे जाने वाले फ्रॉड फंड पर होल्ड/लियन अनुरोधों पर तत्काल कार्रवाई का मुद्दा प्रमुख रहा। इसके साथ ही केवाईसी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारी पुलिस को समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बैंक और पुलिस के बीच सूचना के आदान-प्रदान में होने वाली देरी कई बार जांच और रकम की रिकवरी दोनों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए एक ऐसी प्रक्रिया विकसित करने की जरूरत है, जिसमें शिकायत मिलने से लेकर बैंकिंग कार्रवाई तक हर स्तर पर समय सीमा स्पष्ट हो। बैठक के अंत में रियल टाइम सूचना साझा करने, त्वरित प्रतिक्रिया, सख्त केवाईसी अनुपालन और जीआरएम/एमआरएम को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। उद्देश्य यही है कि साइबर ठगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बैंक के बीच कार्रवाई में कम से कम समय लगे। बैठक की अध्यक्षता एसएसपी/साइबर एंड ऑपरेशंस राजेश कुमार शर्मा, आईपीएस ने की। इसमें डीएसपी/साइबर एवं एसएचओ साइबर क्राइम पटिल स्वागत राजकुमार सहित विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों के नोडल अधिकारी शामिल हुए।

 

 

रकम वापस कराने की प्रक्रिया भी होगी आसान

बैठक में ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (जीआरएम), मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) और अदालत के निर्देश पर रकम की बहाली से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। पुलिस, बैंक और पीड़ित के बीच सूचना साझा करने और रकम बहाल करने की प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने पर मंथन किया गया। इस दौरान एक समान और समयबद्ध प्रक्रिया विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया, ताकि पीड़ित की शिकायत के बाद संबंधित बैंकिंग संस्थान और पुलिस तेजी से कार्रवाई कर सकें। साइबर ठगी की शुरुआत में ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने के लिए एआई, डेटा एनालिटिक्स, ट्रांजेक्शन पैटर्न एनालिसिस और ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने ऐसे सिस्टम विकसित करने की जरूरत बताई, जिनसे असामान्य ट्रांजेक्शन और संदिग्ध खातों की पहचान जल्द हो सके।

 

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