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चंडीगढ़ के पत्रकारों ने किया तनोट मंदिर कॉम्प्लेक्स परियोजना का किया अवलोकन: सीमा सुरक्षा बल की सीमा संबंधी गतिविधियों की जानकारी की हासिल

JJagmarg Desk
चंडीगढ़ के पत्रकारों ने किया तनोट मंदिर कॉम्प्लेक्स परियोजना का किया अवलोकन: सीमा सुरक्षा बल की सीमा संबंधी गतिविधियों की जानकारी की हासिल
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जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर अब न केवल आस्था, बल्कि भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवानों के शौर्य व जांबाजी की गाथाओं का भी प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। 

पर्यटन विभाग द्वारा तनोट माता मंदिर परिसर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर बबलियानवाला पोस्ट को विश्व स्तरीय पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सीमा पर्यटन (बॉर्डर टूरिज्म) को बढ़ावा देना और युवाओं को देश के बहादुर सैनिकों के बलिदान से रूबरू कराना है।

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वीरवार को पीआईबी चंडीगढ़ के साथ राजस्थान आए पत्रकारों के एक अध्ययन दल ने इस सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा कर सीमा सुरक्षा बल की गतिविधियों और विकास परियोजनाओं का जायजा लिया। इस दौरान पत्रकारों ने लोंगेवाला युद्ध स्थल और वहां स्थित संग्रहालय का भी अवलोकन किया। 

बीएसएफ के अधिकारियों ने पत्रकारों को रेगिस्तानी क्षेत्र में सीमा सुरक्षा की चुनौतियों, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और कठिन परिस्थितियों में जवानों के प्रशिक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बॉर्डर टूरिज्म की इस दूरदर्शी पहल से न केवल क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत हो रही है, बल्कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवनस्तर में भी सुधार आ रहा है।

श्री तनोट मंदिर कॉम्प्लेक्स परियोजना पर लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस भव्य परियोजना के अंतर्गत यहाँ आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय, रंगभूमि, इंटरप्रिटेशन केंद्र और बच्चों के लिए विशेष कक्षों का निर्माण किया जा रहा है। 

इन सुविधाओं के विकसित होने से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

तनोट माता जवानों को दुश्मनों से लड़ने की शक्ति करती हैं प्रदान

गौरतलब है कि तनोट माता मंदिर का इतिहास अद्भुत और चमत्कारिक रहा है। मान्यता है कि तनोट माता स्वयं जवानों को दुश्मनों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा मंदिर परिसर में सैकड़ों बम गिराए गए थे, लेकिन माता के चमत्कार से एक भी बम नहीं फटा। अब इस नई परियोजना के माध्यम से इस ऐतिहासिक और सामरिक स्थल को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलने जा रही है।

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