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Chandigarh News: जस्टिस माहेश्वरी ने पीयू के 7वें लॉ दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में की शिरकत, बांटी डिग्रियां

VVinita Kohli
Chandigarh News: जस्टिस माहेश्वरी ने पीयू के 7वें लॉ दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में की शिरकत, बांटी डिग्रियां
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चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी में वीरवार को आयोजित 7वें लॉ दीक्षांत समारोह में जस्टिस (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी, अध्यक्ष लॉ कमीशन ऑफ इंडिया, ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं, बल्कि एक गहरे परिवर्तन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज हम केवल डिग्री प्रदान नहीं कर रहे, बल्कि एक परिवर्तन के साक्षी बन रहे हैं। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रेजुएशन मंज़िल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है।

जस्टिस माहेश्वरी ने जोर देते हुए कहा कि कानून का पेशा निरंतर सीखने, सवाल करने, खुद को सुधारने और फिर से खोजने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि हर अदालत का अनुभव और हर फैसला (जजमेंट) एक नया पाठ सिखाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि आज जो ज्ञान उनके पास है, वह अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे की यात्रा की नींव है। उन्होंने कहा कि भविष्य में आपका चैंबर ही आपका ‘गुरुकुल’ बनेगा और हर ड्राफ्ट किया गया ब्रीफ आपको और निखारेगा।

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जस्टिस माहेश्वरी ने छात्रों से कक्षा से बाहर निकलकर सामाजिक वास्तविकताओं से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को अपने पेशे का मार्गदर्शक बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून केवल यह नहीं है कि वह क्या है, बल्कि यह भी है कि उसे क्या होना चाहिए, इस पर भी विचार करना जरूरी है, ताकि समाज में सुधार और न्याय सुनिश्चित किया जा सके। युवा वकीलों से आह्वान किया गया कि वे न केवल कानून को समझें, बल्कि समाज में न्याय और जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी निभाएं।

एआई उपयोगी, लेकिन न्याय में मानवीय विवेक सर्वोपरि

जस्टिस (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी ने अपने संबोधन में वर्तमान दौर को असाधारण तकनीकी बदलाव का समय बताते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने कानून के क्षेत्र में मजबूत प्रवेश किया है, जिसे न तो नजरअंदाज किया जा सकता है और न ही गलत समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई बड़े स्तर पर केस लॉ को प्रोसेस करने, दस्तावेज तैयार करने और पैटर्न पहचानने में सक्षम है, लेकिन कानून केवल एक एल्गोरिद्म नहीं है। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए विवेक, संवेदनशीलता और मानवीय समझ जरूरी है, जिसे कोई मशीन प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आप अपने निर्णय को किसी मशीन के हवाले कर देते हैं, तो उस दिन आप एक वकील के रूप में अपनी वास्तविक भूमिका खो देते हैं।

दीक्षांत समारोह में 601 छात्रों को मिली डिग्रियां

पंजाब यूनिवर्सिटी के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस के नवनिर्मित मल्टी-पर्पज ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षांत समारोह में कुल 601 लॉ ग्रेजुएट्स को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन जस्टिस (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी मुख्य अतिथि रहे, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पीयू की वाइस चांसलर प्रो. रेणु विग, डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. योजना रावत, रजिस्ट्रार प्रो. वाई.पी. वर्मा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. जगत भूषण, लॉ विभाग की अध्यक्ष प्रो. वंदना अरोड़ा और यूआईएलएस की निदेशक प्रो. श्रुति बेदी सहित अन्य गणमान्य भी मौजूद रहे। प्रो. वंदना अरोड़ा और प्रो. श्रुति बेदी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि अंत में रजिस्ट्रार प्रो. वाई.पी. वर्मा ने दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की।

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