Chandigarh News: चंडीगढ़ नगर निगम में रिश्वतखोरी के आरोप में सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई की जांच का दायरा बढ़ गया है। एजेंसी एफआईआर में दर्ज तथ्यों और कथित बातचीत के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की रकम मांगने और उसे दूसरे अधिकारियों के बीच बांटने के मामले में किसी अन्य अधिकारी की भूमिका थी या नहीं। शक्ति शर्मा को सीबीआई ने 5 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था। वीरवार को अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई के अनुसार, शक्ति शर्मा पर डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी और टिप्पर सेवाएं देने वाले ठेकेदार से कुल 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। आरोप है कि यह रकम लंबित बिलों का भुगतान कराने और भविष्य के बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले मांगी गई थी। एजेंसी का दावा है कि शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग से संबंधित बातचीत रिकॉर्ड की गई, जिसमें कथित तौर पर रकम को निगम के अन्य अधिकारियों के बीच बांटने का जिक्र भी सामने आया।
एफआईआर में दूसरे अधिकारियों का जिक्र, शिकायत निगम के भीतर भी पहुंची
सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, ठेकेदार ने कथित रिश्वत मांग को लेकर नगर निगम के भीतर भी अधिकारियों से संपर्क किया था। शिकायतकर्ता ने ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह और एसएएस/अकाउंट सेक्शन के संदीप सेठी से अपनी बात रखी थी। आरोप है कि वहां से भी उसे शक्ति शर्मा की मांग के अनुसार रकम देने के लिए कहा गया।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया कि रिश्वत नहीं देने पर ठेकेदार के लंबित भुगतान रोकने और उसकी फर्म का ठेका रद्द करने की धमकी दी गई। सीबीआई अब एफआईआर में दर्ज इन तथ्यों और कथित बातचीत के आधार पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। हालांकि, एफआईआर में किसी अधिकारी का नाम आने या आरोप लगाए जाने मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। मामले में जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्य आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
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ठेकेदार की शिकायत के बाद सीबीआई ने बिछाया जाल
सेक्टर-50 निवासी प्रशांत भदौरिया ने 5 अक्टूबर को सीबीआई में शिकायत दी थी। उनकी फर्म पीपल कनेक्ट सर्विसेज को मार्च 2026 में शहर की विभिन्न लैंडफिलिंग साइटों पर अर्थमूवर सेवाएं उपलब्ध कराने का तीन साल का ठेका मिला था। इस काम के तहत जेसीबी और टिप्पर जैसी मशीनों की सेवाएं दी जानी थीं। शिकायत के अनुसार, शक्ति शर्मा जुलाई 2025 से रिश्वत की मांग कर रहे थे। सितंबर में लंबित भुगतान और जेसीबी-टिप्पर की उपस्थिति को लेकर हुई बातचीत के दौरान जुलाई 2025 से जुलाई 2026 तक हर महीने एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 14 लाख रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया गया। सीबीआई ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद 7 अक्टूबर को अपनी एंटी करप्शन ब्रांच, चंडीगढ़ में मामला दर्ज किया। इसके बाद जांच इंस्पेक्टर अरुण अहलावत को सौंपी गई। सीबीआई ने सेक्टर-11 में ट्रैप लगाया और शक्ति शर्मा को 5 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। अब एजेंसी गिरफ्तारी से जुड़े साक्ष्यों के साथ कथित बातचीत और एफआईआर में दर्ज अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
लंबित बिलों और ठेकों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
इस मामले में जांच का एक अहम पहलू नगर निगम के ठेकेदारों के बिलों के भुगतान और कामकाज से जुड़ी प्रक्रियाएं हैं। शिकायत के मुताबिक, रिश्वत की मांग को लंबित भुगतान और भविष्य के बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से जोड़ा गया था। ऐसे में सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर मांगी गई रकम का बंटवारा किस तरह होना था और क्या इस संबंध में अन्य अधिकारियों की कोई भूमिका थी। शक्ति शर्मा को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। फिलहाल आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी है। इस मामले का असर नगर निगम में ठेकेदारों के भुगतान, सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

