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Chandigarh News: मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत पर संकट, 175 करोड़ रुपये के री-कार्पेटिंग कार्यों की रफ्तार थमी

VVinita Kohli
Chandigarh News: मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत पर संकट, 175 करोड़ रुपये के री-कार्पेटिंग कार्यों की रफ्तार थमी
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चंडीगढ़: शहर में सड़कों की मरम्मत और री-कार्पेटिंग का काम बिटुमेन की भारी कमी के चलते बुरी तरह प्रभावित हो गया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से पैदा हुए संकट ने शहर में 175 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क परियोजनाओं की रफ्तार थाम दी है। हालात यह हैं कि अब तक केवल 25 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि बाकी परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। मानसून से पहले जिन सड़कों की मरम्मत पूरी होनी थी, वे अब अधूरी पड़ी हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यदि जल्द बिटुमेन की उपलब्धता सामान्य नहीं हुई तो बरसात के दौरान शहरवासियों को टूटी और जर्जर सड़कों के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बिटुमेन मिलना लगभग मुश्किल हो गया है। शहर में अधिकांश सप्लाई इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की पानीपत रिफाइनरी से होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वहां से पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनके ठेकेदार भी पूरी तरह आईओसीएल की सप्लाई पर निर्भर हैं और मौजूदा समय में बिटुमेन उपलब्ध नहीं हो रहा। इसके कारण काम की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है और स्थिति कब सामान्य होगी, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए केवल एक महीने का ही समय बचा है। जुलाई के बाद मानसून के कारण बिटुमिन सेट नहीं हो पाता जिससे निर्माण कार्य रुक जाता है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में आपूर्ति अनिश्चित है और यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो शहर में सड़क निर्माण गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

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अधिकारियों ने बताया कि बिटुमेन संकट के कारण ठेकेदारों की मशीनरी और श्रमिक खाली बैठे हैं। नगर निगम के तहत काम कर रहे करीब आठ बड़े ठेकेदार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए ठेकेदारों ने एचपीसीएल बठिंडा से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। दरअसल, मई और जून का समय सड़क री-कार्पेटिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस प्रक्रिया के लिए उच्च तापमान जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकांश परियोजनाओं की योजना पहले ही बना ली गई थी, टेंडर जारी कर काम भी अलॉट कर दिए गए थे। लेकिन अचानक आई सप्लाई संकट ने पूरी टाइमलाइन बिगाड़ दी। शहर की कई प्रमुख सड़कें पहले से ही टूटी और जर्जर हालत में हैं, जो लंबे समय से री-कार्पेटिंग का इंतजार कर रही थीं। सेक्टरों की आंतरिक सड़कों से लेकर मुख्य मार्गों तक जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सतह लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अब बिटुमेन संकट के चलते इन सड़कों की मरम्मत और भी लंबी खिंचने की आशंका बढ़ गई है।

स्टील की सप्लाई प्रभावित होने से स्ट्रीट लाइट पोल बदलने का काम रुका 

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब चंडीगढ़ के विकास कार्यों पर भी पड़ने लगा है। शहर के कई इलाकों में टूटे और गायब स्ट्रीट लाइट पोल बदले जाने थे, लेकिन अब यह काम रुक गया है। वजह है स्टील की सप्लाई प्रभावित होना। नगर निगम ने नए पोल लगाने के लिए टेंडर जारी कर काम अलॉट भी कर दिया था, लेकिन ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें सामान नहीं मिल रहा। ऐसे में फिलहाल नए पोल लगाना संभव नहीं है। 

अधिकारियों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर मंडी गोबिंदगढ़ की स्टील इंडस्ट्री पर पड़ा है, जिसे एशिया की सबसे बड़ी स्टील री-रोलिंग इंडस्ट्री माना जाता है। वहां उत्पादन प्रभावित होने से स्टील महंगी हो गई है और सप्लाई भी समय पर नहीं मिल रही। नगर निगम के अनुसार, एक्सीडेंट, आंधी-तूफान और अन्य कारणों से शहर में सैकड़ों स्ट्रीट लाइट पोल टूट चुके हैं। कई इलाकों में पोल लगाने के ऑर्डर जारी हो चुके हैं, लेकिन सामान की कमी के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा। इसके चलते कई जगह रात के समय अंधेरा रहने लगा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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