Dasmesh Public School Kot Data Scholarship Fraud : पट्टी के कोट दाता स्थित दशमेश पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) राशि में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। भारत सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि के वितरण में हुई अनियमितताओं के बाद पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल, मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान और एक क्लर्क के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच में दर्जनों विद्यार्थियों के खातों तक छात्रवृत्ति का पैसा नहीं पहुंचने की बात सामने आने के बाद शिक्षा और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा
यह पूरा मामला तरनतारन जिले के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के कार्यालय द्वारा जारी किए गए पत्रों के बाद सामने आया है। विभाग के निर्देशों पर जब कोट दाता स्थित दशमेश पब्लिक स्कूल के वित्तीय और छात्रवृत्ति रिकॉर्ड की दोबारा भौतिक जांच की गई, तो गंभीर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के दौरान स्कूल के कुल 68 विद्यार्थियों के नाम छात्रवृत्ति आई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 41 छात्रों के खातों में ही राशि पहुंचने का रिकॉर्ड मिला। बाकी के 27 विद्यार्थियों के संबंध में स्कूल प्रबंधन कोई भी संतोषजनक रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। यही नहीं, वर्ष 2022-23 के भी 15 विद्यार्थियों से जुड़ा रिकॉर्ड पूरी तरह गायब मिला।
नामजद आरोपियों पर लगा आपराधिक विश्वासघात का आरोप
जांच में स्पष्ट हुआ कि इस पूरे मामले में गंभीर स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी की गई है। इसके आधार पर स्कूल की प्रिंसिपल मधु बाला, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान सतिंदरपाल सिंह (निवासी वार्ड नंबर 17, पट्टी) और क्लर्क हरप्रीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन सभी ने आपसी मिलीभगत से विद्यार्थियों के हक का पैसा खुर्द-बुर्द करने की साजिश रची और आपराधिक विश्वासघात को अंजाम दिया।
पुलिस खंगाल रही है अन्य दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पिछले अन्य वर्षों में भी इस तरह की गड़बड़ी को अंजाम दिया गया था या नहीं। रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल के बाद इस मामले में कुछ और खुलासे होने की पूरी संभावना है, जिससे स्कूल प्रबंधन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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