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DCRUST Murthal News: मुरथल यूनिवर्सिटी में 50 करोड़ का 'FD घोटाला'? निजी बैंक में पैसा जमा कराने पर मंचा बवाल

AAmandeep Singh
मुरथल यूनिवर्सिटी में 50 करोड़ का 'FD घोटाला'? निजी बैंक में पैसा जमा कराने पर मंचा बवाल
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सोनीपत। सोनीपत का प्रतिष्ठित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST) इन दिनों अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के चलते सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय के छात्र कोष से जुड़े करीब 50 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इस राशि को किसी सरकारी बैंक के बजाय एक निजी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के तौर पर जमा कराया गया। शैक्षणिक संगठन डीक्रूटा (DCRUTA) ने इस पूरे मामले में ‘कमीशनखोरी’ की बू आने का दावा करते हुए सीधे तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है।

छात्रों का पैसा और ‘निजी’ हित: नियमों की अनदेखी का आरोप

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डीक्रूटा के प्रधान अजय डबास ने मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्र कोष की राशि को सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार सरकारी संस्थानों में ही रखा जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर कम ब्याज दर के बावजूद निजी बैंक का चुनाव करना किसी बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय एक्ट और अकाउंट्स कोड की अनदेखी करते हुए बिना सरकारी अनुमति के लीगल एडवाइजर और स्टैंडिंग काउंसल की नियुक्तियां करने के भी आरोप लगे हैं। संगठन का दावा है कि वाइस चांसलर के कार्यकाल में नियमों को दरकिनार कर केवल चहेतों को लाभ पहुँचाया जा रहा है।

खंडहर बनते फ्लैट्स और जर्जर हॉस्टल: कहाँ जा रहा है बजट?

एक तरफ जहाँ करोड़ों की एफडी का ‘खेल’ चल रहा है, वहीं यूनिवर्सिटी कैंपस की जमीनी हकीकत डराने वाली है। कैंपस में स्थित करीब 50 सरकारी फ्लैट वर्षों से खाली पड़े-पड़े खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। छात्रों के लिए बने हॉस्टलों की हालत भी बेहद दयनीय है; छतों से प्लास्टर गिर रहा है और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर छात्र संघर्ष करने को मजबूर हैं। कई बार आंदोलन होने के बावजूद प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। रखरखाव के बजट का इस्तेमाल कहाँ हो रहा है, यह अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

सरकार की प्रतिक्रिया: जांच कमेटी के पाले में गेंद

इस पूरे विवाद पर जब हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली और स्थानीय विधायक निखिल मदान से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। नेताओं ने आश्वस्त किया कि एक विशेष कमेटी इस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कर रही है। मोहनलाल बडोली ने दो टूक शब्दों में कहा, “सरकार किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” फिलहाल, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के दरबार में पहुँची इस शिकायत ने विश्वविद्यालय की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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