First Aid For Burned Child: छोटे बच्चों का घर में खेलते-कूदते समय हादसों का शिकार होना आम बात है। कई बार जरा सी लापरवाही में बच्चा गर्म पानी, उबलती चाय या दूध की चपेट में आ जाता है। ऐसे में माता-पिता अक्सर घबरा जाते हैं और हड़बड़ी में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे बच्चे की कोमल त्वचा को और अधिक नुकसान पहुंचता है। पीडियाट्रीशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) डॉ. मितुल जैन सहगल के अनुसार, किसी भी लिक्विड से जलने के तुरंत बाद के 10 से 15 मिनट बेहद संवेदनशील होते हैं। सही समय पर सही तरीके से दिया गया प्राथमिक उपचार बच्चे को दर्द और बड़े डैमेज से बचा सकता है।
1. गहने और कपड़े तुरंत हटाएं, पर जबरदस्ती न करें
घटना होते ही सबसे पहला काम यह करें कि जलने वाली जगह के आसपास मौजूद कपड़े, धागे, चूड़ी या अन्य एक्सेसरीज को तुरंत निकाल दें। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि जलने के कुछ ही देर बाद त्वचा में तेजी से सूजन आने लगती है और बाद में कपड़े या गहने उतारना बेहद तकलीफदेह हो जाता है। हालांकि, डॉक्टर की एक सख्त हिदायत यह भी है कि यदि कोई कपड़ा जलकर त्वचा से बुरी तरह चिपक गया हो, तो उसे जबरदस्ती खींचकर हटाने की गलती न करें। इससे त्वचा छिल सकती है।
2. बहते ठंडे पानी का इस्तेमाल करें, कभी न लगाएं बर्फ
अक्सर लोग जलने पर सीधे बर्फ रगड़ने की भूल करते हैं, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रभावित हिस्से को तुरंत नल के नीचे 15 से 20 मिनट तक बहते हुए ठंडे पानी की धार में रखें। बहता पानी जलन को कम करता है और त्वचा के अंदरूनी ऊतकों (tissues) तक गर्मी को फैलने से रोकता है। जली हुई स्किन पर बर्फ लगाने से वहां का ब्लड सर्कुलेशन अचानक रुक सकता है, जिससे टिश्यू डैमेज और बढ़ जाता है।
3. टूथपेस्ट, हल्दी और देशी घी से बनाएं दूरी
घरेलू नुस्खों के नाम पर अक्सर लोग जली हुई जगह पर टूथपेस्ट, हल्दी, आलू का रस या देशी घी मल देते हैं। डॉक्टर मितुल जैन के मुताबिक, यह बेहद खतरनाक अभ्यास है। यह पेस्ट त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देता है और अंदरूनी गर्मी (Heat) को बाहर नहीं निकलने देता। इससे घाव गहरा हो जाता है और बैक्टीरिया पनपने के कारण गंभीर इन्फेक्शन फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
4. फफोले या छाले हो जाएं तो गलती से भी न फोड़ें
जलने के कुछ समय बाद अगर त्वचा पर पानी भरा छाला (फफोला) बन जाए, तो उसे फोड़ने या छेड़ने की भूल न करें। यह छाला वास्तव में शरीर का एक कुदरती सुरक्षा तंत्र (Protective Layer) होता है, जो नीचे की नई और नाजुक स्किन को बाहरी इन्फेक्शन और हवा से बचाकर रखता है। अगर आप इसे फोड़ देते हैं, तो घाव खुला रह जाता है और उसमें बैक्टीरिया जाने का रास्ता आसान हो जाता है।
5. प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर को जरूर दिखाएं
चाहे जलने का निशान छोटा हो या बड़ा, प्राथमिक उपचार देने के तुरंत बाद बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल जरूर ले जाएं। कई बार ऊपर से घाव सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर तक स्किन लेयर्स डैमेज हो चुकी होती हैं। डॉक्टर घाव की गंभीरता के हिसाब से एंटीसेप्टिक ऑइंटमेंट और दवाइयां देते हैं, जिससे बच्चे को दर्द से राहत मिलती है और भविष्य में त्वचा पर दाग-धब्बे बनने की गुंजाइश भी कम हो जाती है।
यह भी पढ़ें– डेंगू में प्लेटलेट काउंट 40 हजार आने पर भी क्यों नहीं घबराना चाहिए? जानें डॉक्टरों की असली राय

