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National Para Athletics Championship; हरियाणा बना पैरा एथलेटिक्स का सुल्तान! नेशनल चैंपियनशिप में 95 पदक जीतकर रचा इतिहास

AAmandeep Singh
हरियाणा बना पैरा एथलेटिक्स का सुल्तान! नेशनल चैंपियनशिप में 95 पदक जीतकर रचा इतिहास
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हरियाणा। हरियाणा के आंगन में खेलों की खुशियां एक बार फिर सातवें आसमान पर हैं। उड़ीसा में संपन्न हुई 24वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा के दिव्यांग एथलीटों ने वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद हर खेल प्रेमी को थी। विपरीत परिस्थितियों को मात देकर मैदान में उतरे इन योद्धाओं ने न केवल पदक जीते, बल्कि ओवरऑल चैंपियन ट्रॉफी जीतकर हरियाणा को देश का नंबर-1 राज्य बना दिया है। हरियाणा के इस 144 सदस्यीय दल ने अपनी लगन और मेहनत से यह साबित कर दिया कि हौसले के आगे शारीरिक बाधाएं कभी दीवार नहीं बन सकतीं।

पदकों की बरसात: 36 गोल्ड के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर

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प्रतियोगिता के आंकड़ों पर नजर डालें तो हरियाणा की झोली पदकों से लबालब नजर आती है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुल 95 मेडल अपने नाम किए, जिनमें 36 स्वर्ण (Gold), 29 रजत (Silver) और 25 कांस्य (Bronze) पदक शामिल हैं। इस शानदार उपलब्धि पर पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ हरियाणा की अध्यक्ष एवं प्रदेश की स्वास्थ्य व खेल मंत्री आरती राव ने टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने जोश और जज्बे का जो प्रदर्शन किया है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हरियाणा ‘दूध-दही का खाणा’ ही नहीं, बल्कि ‘चैंपियनों की खान’ भी है।

मैदान के इन दिग्गजों ने बढ़ाया मान

चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया। क्लब थ्रो में प्रणव सुरमा, धर्मबीर और टेकचंद ने सुनहरी कामयाबी हासिल की, तो वहीं जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) में नवदीप, रिंकू हुड्डा और सुमित ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। ट्रैक इवेंट्स की बात करें तो अंकुर धामा ने 1500 मीटर दौड़ में अपनी रफ्तार का जादू बिखेरा और गोल्ड मेडल जीता। दीपक रविश ने भी अपनी इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर टीम के स्कोर को मजबूती दी।

हरियाणा की बेटियों ने भी रचा इतिहास

केवल पुरुष खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि हरियाणा की महिला एथलीटों ने भी मैदान मार लिया। क्लब थ्रो में पूजा यादव और जेवलिन थ्रो में कंचन लखानी ने शानदार प्रदर्शन कर पदक जीते। इनके अलावा उषा, माफी, भुवि अग्रवाल, दयावंती, प्रीति और लक्ष्मी जैसी महिला खिलाड़ियों ने भी पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। खेल उपनिदेशक एवं द्रोणाचार्य/ध्यानचंद अवॉर्डी गिरिराज सिंह ने इन खिलाड़ियों की उपलब्धि को ऐतिहासिक करार देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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