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राज्यसभा में सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों पर चिंता, कांग्रेस ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की

VVinita Kohli
राज्यसभा में सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों पर चिंता, कांग्रेस ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की
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नई दिल्ली: राज्यसभा में बृहस्पतिवार को सोने और चांदी की कीमतों में हाल में हुई बेतहाशा वृद्धि को लेकर कांग्रेस के सदस्य नीरज डांगी ने चिंता व्यक्त की और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उच्च सदन के शून्यकाल के दौरान उन्होंने कहा कि देश में सोना और चांदी की तेजी से बढ़ती कीमतों ने ग्रामीण भारत, विशेषकर महिलाओं और विवाह करने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है।

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सोने-चांदी की कीमतों में हुई भारी वृद्धि

नीरज डांगी ने बताया कि दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच भारत में चांदी की कीमतों में लगभग 306 प्रतिशत और सोने की कीमतों में 111 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सोना और चांदी भारत में नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा है, और इनकी कीमतों में इस कदर बेतहाशा वृद्धि सरकार की नीतिगत और आर्थिक असफलता को दर्शाती है।

ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ

डांगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार शादी के अवसर पर न्यूनतम आभूषण भी नहीं खरीद पा रहे हैं, जबकि कई मध्यमवर्गीय परिवारों ने विवाह समारोह को स्थगित करना पड़ा है। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों में विसंगति बताया, जिसमें महिला सशक्तिकरण की बातें कही जाती हैं, लेकिन उच्च आयात शुल्क, भारी जीएसटी और सट्टेबाजों तथा जमाखोरों पर नियंत्रण न होने के कारण आम महिलाओं की बचत लगातार मूल्यहीन हो रही है।

सरकार पर निशाना, सट्टेबाजों और जमाखोरों पर कार्रवाई की मांग

नीरज डांगी ने कहा कि मौजूदा नीतियों में साधारण महिलाएं आर्थिक बोझ झेल रही हैं, वहीं जमाखोरों और सट्टेबाजों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और सट्टेबाजों एवं जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

अन्य मुद्दों पर शून्यकाल में चर्चा

शून्यकाल के दौरान माकपा सदस्य वी शिवदासन ने देश में शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने की मांग उठाई। वहीं उनकी ही पार्टी के जॉन ब्रिटास ने हवाई किरायों को नियंत्रित करने और हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के हवाई यातायात क्षेत्र में कुछ कंपनियों का एकाधिकार है और इसके कारण यात्रियों के हितों की अनदेखी हो रही है।

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