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Jyotisar Kurukshetra Tourism: ज्योतिसर में कैमरों में कैद हो रहीं यादें, आध्यात्मिक अनुभूति भी ले रहे पर्यटक

AAmandeep Singh
Jyotisar Kurukshetra Tourism: ज्योतिसर में कैमरों में कैद हो रहीं यादें, आध्यात्मिक अनुभूति भी ले रहे पर्यटक
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ज्योतिसर। (पवन शर्मा) हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें इन दिनों सैलानियों से गुलजार हैं। जैसे ही जून की तपती गर्मियों और स्कूलों की छुट्टियों का दौर शुरू हुआ, गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में पर्यटकों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों से परिवार सहित पहुंच रहे श्रद्धालुओं के चलते इस पावन परिसर में सुबह से लेकर शाम तक भारी चहल-पहल देखी जा रही है।

अक्षय वट की छांव में कैमरों में कैद हो रहे यादगार पल

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ज्योतिसर पहुंचने वाले हर एक श्रद्धालु की सबसे पहली और मुख्य चाहत उस पावन अक्षय वट (बरगद के पेड़) के दर्शन करने की होती है, जिसके नीचे खड़े होकर महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का मोहभंग करते हुए गीता का अमर संदेश दिया था। इस पवित्र वृक्ष के सान्निध्य में आते ही युवा और बुजुर्ग सभी अपने मोबाइल कैमरे ऑन कर लेते हैं। कोई ग्रुप फोटो खिंचवा रहा है तो कोई इस ऐतिहासिक पल को सेल्फी में कैद कर रहा है। आज का युवा वर्ग इस पावन स्थली की महत्ता को दर्शाते हुए रील्स और वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जमकर साझा कर रहा है।

मोबाइल स्क्रीन से हटकर विरासत को समझने की ललक

तीर्थ क्षेत्र का भ्रमण करने आए सैलानियों का नजरिया इस बार थोड़ा जुदा और परिपक्व दिखाई दे रहा है। दिल्ली और राजस्थान से पहुंचे कुछ पर्यटकों ने बातचीत में बताया कि तस्वीरें और वीडियो तो सफर की यादों को सहेजने का एक जरिया मात्र हैं, लेकिन ज्योतिसर की असली रूह तो इसके शांत, आध्यात्मिक वातावरण और यहां की आबोहवा में रचे-बसे गीता के ज्ञान में है। यही वजह है कि लोग केवल कैमरे क्लिक करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कुछ पल सुकून से बैठकर यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को निहार रहे हैं और तीर्थ की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने की कोशिश में जुटे हैं।

आत्मिक शांति और सनातनी जड़ों की ओर वापसी

ज्योतिसर की इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का स्पष्ट मानना है कि यह कोई आम पर्यटन स्थल नहीं है जहां सिर्फ मनोरंजन के लिए आया जाए। यह भूमि आत्मिक शांति और अपनी सनातनी संस्कृति से दोबारा जुड़ने का एक दुर्लभ और पावन अवसर देती है। यहां के पवित्र सरोवरों के घाट और चारों तरफ गूंजते मंत्रोच्चार मन को एक अलग ही सुकून देते हैं। यही कारण है कि कुरुक्षेत्र की इस पावन धरा से विदा लेते समय पर्यटक न केवल अपने फोन की मेमोरी में सैकड़ों तस्वीरें ले जा रहे हैं, बल्कि जीवन भर साथ रहने वाले एक गहरे आध्यात्मिक और अलौकिक अनुभव को भी अपने मन में संजोकर लौट रहे हैं।

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