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Kaithal Census 2026:कैथल में जनगणना का 'फ्लॉप' आगाज: कहीं किट का टोटा तो कहीं धुंधले नक्शों ने बिगाड़ा खेल, पहले ही दिन प्रशासनिक तंत्र फेल

GGaganpreet Kaur
कैथल में जनगणना का 'फ्लॉप' आगाज: कहीं किट का टोटा तो कहीं धुंधले नक्शों ने बिगाड़ा खेल, पहले ही दिन प्रशासनिक तंत्र फेल
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कैथल (जग मार्ग)। जिला प्रशासन द्वारा महीनों से की जा रही जनगणना की तैयारियां धरातल पर उतरते ही ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आईं। शुक्रवार को जब जिले भर में 1840 प्रगणकों (इन्यूमरेटर्स) को घर-घर जाकर डेटा जुटाना था, तब व्यवस्थाओं के भंवर में फंसा यह अभियान पहले ही दिन दम तोड़ता दिखा। अव्यवस्था का आलम यह था कि कई खंडों में कर्मचारियों को हाथ में पेन और फॉर्म तक नसीब नहीं हुए, तो कहीं विभाग द्वारा दिए गए वार्डों के नक्शे किसी पहेली से कम नहीं थे।

संसाधनों के बिना कैसे हो गणना?

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पूंडरी और सीवन खंड से जो खबरें आईं, वे प्रशासन की गंभीरता पर सवालिया निशान लगाती हैं। यहां तैनात प्रगणकों ने दोटूक कहा कि बिना फॉर्म, स्टेशनरी और आधिकारिक किट के वे लोगों के दरवाजे कैसे खटखटाएं? सरकारी छुट्टी का भी असर दिखा, जिससे समन्वय की कमी साफ नजर आई। कलायत खंड में तो प्रशासन ने औपचारिकता निभाते हुए किट तो बांट दी, लेकिन तकनीकी पेचीदगियों के चलते कर्मचारी दिन भर नक्शों से माथापच्ची ही करते रह गए। फील्ड वर्क तो दूर, वास्तविक ड्राइंग तैयार करने में ही सूरज ढल गया।

चीका में ‘नक्शा’ साफ नहीं, डेटा की शुद्धता पर संकट

चीका क्षेत्र में समस्या कुछ अलग और गंभीर दिखी। यहां किट तो मिली, लेकिन उसमें दिए गए वार्ड और गांवों के नक्शे फोटोकॉपी की फोटोकॉपी जैसे धुंधले थे। प्रगणकों की मानें तो इन नक्शों में न गलियां स्पष्ट हैं और न ही मकानों का सीमांकन। ऐसे में डेटा की सटीकता और शुद्धता पर प्रश्नचिह्न लगना तय है। जब कर्मचारी को पता ही नहीं होगा कि उसकी बीट की सीमा कहां खत्म हो रही है, तो वह जनगणना के आंकड़ों के साथ न्याय कैसे कर पाएगा?

कैथल में अफवाहों का पहरा, डरे हुए हैं लोग

शहर के कुछ वार्डों में टीमें मैदान में जरूर उतरीं, लेकिन वहां उन्हें जनता की ‘चुप्पी’ और ‘खौफ’ का सामना करना पड़ा। अफवाहों और जागरूकता की कमी के चलते लोग अपनी निजी जानकारी साझा करने को असुरक्षित मान रहे हैं। लोग पूछताछ के दौरान असहज दिखे और कई जगह तो टीमों को बैरंग ही लौटना पड़ा। हालांकि, कुछ प्रगणकों ने समझाइश कर काम शुरू करने की कोशिश की, लेकिन असहयोग का यह रवैया अभियान की गति को धीमा कर रहा है।

अधिकारियों के दावे और हकीकत का फासला

प्रशासनिक आंकड़ों की मानें तो जिले में 1840 प्रगणक और 330 सुपरवाइजर तैनात हैं। जब इस अव्यवस्था पर एसडीएम कैथल संजय कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल की शाम तक सभी खंड प्रभारियों को सामग्री भेज दी गई थी। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि किट प्रगणकों तक क्यों नहीं पहुंची और इसकी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

खंड कुल शिक्षक ड्यूटी पर तैनात

सीवन 490  132

कलायत 630        150

राजौंद 554        49

कैथल 1556      595

पूंडरी 915        527

गुहला 559        296

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