September 27, 2026

Ketu Nakshatra Parivartan: बुध के नक्षत्र में आ रहे हैं केतु, जानें कौन से उपाय चमकाएंगे आपकी किस्मत

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Ketu Nakshatra Parivartan: बुध के नक्षत्र में आ रहे हैं केतु, जानें कौन से उपाय चमकाएंगे आपकी किस्मत

बुध के नक्षत्र में आ रहे हैं केतु, जानें कौन से उपाय चमकाएंगे आपकी किस्मत

Ketu Nakshatra Parivartan: वैदिक ज्योतिष में केतु को एक छाया और रहस्यमयी ग्रह माना गया है। केतु का राशि या नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से काफी उथल-पुथल लाने वाला माना जाता है। पंचांगीय गणना के अनुसार, आगामी (Ketu Nakshatra Parivartan November 2026) 25 नवंबर 2026 को दोपहर 4 बजकर 34 मिनट पर केतु ग्रह आश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं।

आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं, जो ज्योतिष में बुद्धि, व्यापार, तर्कशक्ति और संचार के कारक माने जाते हैं। ऐसे में बुध के नक्षत्र में केतु का यह गोचर सीधे तौर पर लोगों के सोचने-समझने की क्षमता और आर्थिक फैसलों पर असर डाल सकता है।

इन गलतियों को करने से बचें: बढ़ सकती हैं आर्थिक व मानसिक परेशानियां

ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, केतु के आश्लेषा नक्षत्र में रहने के दौरान व्यक्ति को अपने आचरण, भाषा और लेन-देन में खास सावधानी बरतनी चाहिए: (Ketu Remedies Ganesh Puja)

जोखिम भरे निवेश से दूरी: इस अवधि में किसी के बहकावे में आकर लॉटरी, सट्टेबाजी या बिना गहन शोध के नए कारोबार में भारी पैसा लगाने से बचें। जल्दबाजी में लिए गए फैसले बड़ा आर्थिक नुकसान करा सकते हैं।

बेजुबान जानवरों को न सताएं: ज्योतिष में केतु का संबंध कुत्ते से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दौरान कुत्तों या किसी भी बेजुबान जानवर को मारना, उन्हें परेशान करना या भूखा रखना केतु के दोष को बढ़ा सकता है।

साधु-संतों का न करें अपमान: धार्मिक परंपराओं में साधु-संतों, पुजारियों और बुजुर्गों का अनादर करना अशुभ माना गया है। ऐसा करने से केतु के प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।

छल-कपट और असत्य से बचें: केतु के इस नक्षत्र परिवर्तन के दौरान किसी के साथ धोखाधड़ी करना, झूठ बोलना और बिना बात के बहस में उलझना आपके बनते कामों को बिगाड़ सकता है।

केतु को शांत और अनुकूल बनाने के आसान धार्मिक उपाय

केतु के इस गोचर काल के दौरान जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं: (Ashlesha Nakshatra Lord Mercury)

श्वान सेवा (कुत्तों की देखभाल): गली के बेसहारा कुत्तों को नियमित रूप से रोटी, बिस्कुट या दूध-पानी देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

गणेश जी की उपासना: भगवान श्री गणेश को केतु का अधिष्ठाता देव माना गया है। इस दौरान नियमित रूप से गणेश चालीसा, गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें और प्रतिदिन ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

दान-पुण्य: जरूरतमंदों को काले कंबल या तिल का दान करना भी केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने में मददगार माना जाता है।

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