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Ladwa Child Sex Ratio: लाडवा के दो गांवों में लिंगानुपात गिरने से हड़कंप: छलोंदी और बरौंदा पहुंचे स्वास्थ्य अधिकारी, शुरू हुई कड़ी निगरानी

GGaganpreet Kaur
लाडवा के दो गांवों में लिंगानुपात गिरने से हड़कंप: छलोंदी और बरौंदा पहुंचे स्वास्थ्य अधिकारी, शुरू हुई कड़ी निगरानी
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लाडवा (विजय कौशिक) हरियाणा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तमाम दावों के बीच कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा उपमंडल से एक चिंताजनक जमीनी हकीकत सामने आई है। क्षेत्र के दो प्रमुख गांवों, छलोंदी और बरौंदा में लैंगिक असंतुलन (लिंगानुपात) का ग्राफ गिरकर 800 के खतरनाक स्तर से भी नीचे पहुंच गया है। इस सामाजिक विसंगति ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के कान खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार के कड़े रुख को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा ने इन दोनों गांवों को ‘रेड जोन’ मानते हुए वहां विशेष अभियान छेड़ दिया है। मंगलवार को गांवों की गलियों में जागरूकता रैलियां निकाली गईं, जिसमें गूंजते नारों के जरिए ग्रामीणों को बेटियों के संरक्षण के प्रति आगाह किया गया।

घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की होगी मैपिंग, स्वास्थ्य विभाग ने तैनात कीं टीमें

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लाडवा सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (SMO) डॉ. कृष्णकांत ने इस आपात स्थिति पर बात करते हुए बताया कि इन दोनों गांवों की स्थिति सुधारने के लिए विभाग ने एक थ्री-टियर (त्रिस्तरीय) रणनीति तैयार की है। इसके तहत एएनएम (ANM) और आशा कार्यकर्ताओं की विशेष टीमों को मैदान में उतारा गया है, जो गांव के भीतर हर एक गर्भवती महिला का पूरा रिकॉर्ड (फॉलोअप) खंगालेंगी। गर्भधारण से लेकर प्रसव तक की पूरी प्रक्रिया पर विभाग की पैनी नजर रहेगी, ताकि कन्या भ्रूण हत्या जैसी किसी भी संभावित सामाजिक कुरीति या अवैध कृत्य को गर्भ में ही कुचला जा सके।

निजी क्लीनिक और केमिस्ट रडार पर; पीसी-पीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन पर सीधे जेल

इस मुहिम का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाडवा शहर और आसपास के निजी चिकित्सा जगत पर भी इसका हंटर चला है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि लिंग चयन (Medical Termination of Pregnancy) या अवैध रूप से लिंग जांच की कड़ियां अक्सर निजी क्लीनिकों और केमिस्टों से जुड़ती हैं। डॉ. कृष्णकांत ने क्षेत्र के सभी प्राइवेट डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं को आधिकारिक नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी है कि वे गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PC-PNDT) अधिनियम के प्रावधानों का अक्षरशः पालन करें। विभाग की खुफिया टीमें गुप्त रूप से इन केंद्रों की रेकी कर रही हैं, और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर सीलिंग और केस दर्ज करने की कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाएगी।

“बेटियां बोझ नहीं, जीवन का आधार”; एसएमओ ने समाज से की आत्ममंथन की अपील

अभियान के दौरान ग्रामीणों को संबोधित करते हुए डॉ. कृष्णकांत ने एक अनुभवी मार्गदर्शक की तरह समाज को झकझोरा। उन्होंने दोटूक कहा, “बेटी है जीवन का आधार, भ्रूण हत्या है बड़ा अत्याचार।” उन्होंने स्थानीय मौजिज लोगों और युवाओं से अपील की कि वे इस आंकड़े को महज एक सरकारी नंबर न समझें, बल्कि यह आने वाले कल के सामाजिक संकट की आहट है। बेटियां समाज की वो अमूल्य धरोहर हैं, जिनके बिना एक संतुलित और स्वस्थ समाज की कल्पना पूरी तरह बेमानी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक ग्रामीण खुद आगे आकर इस कुप्रथा के खिलाफ मुखबिर नहीं बनेंगे, तब तक प्रशासनिक कोशिशें अधूरी रहेंगी।

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