लुधियाना में ढाई साल की बच्ची को जिंदा दफनाने वाली आरोपी महिला की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली
लुधियाना में बच्ची की हत्या का मामला
Ludhiana Murder Case: लुधियाना में ढाई साल की बच्ची दिलरोज कौर की हत्या के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी नीलम की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि नीलम को 30 साल जेल में रहना होगा और इस अवधि के दौरान उसे किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी। करीब दो साल पहले सेशन कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। यह मामला नवंबर 2021 का है, जब लुधियाना के शिमलापुरी इलाके में रहने वाली दिलरोज अचानक लापता हो गई थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि पड़ोस में रहने वाली नीलम ही बच्ची को अपनी एक्टिवा पर बैठाकर ले गई थी। बाद में पूछताछ के दौरान उसने जुर्म कबूल किया और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने बच्ची का शव एक खाली प्लॉट में खोदे गए गड्ढे से बरामद किया था।
दिलरोज कौर के पिता हरप्रीत सिंह पंजाब पुलिस में हेड कांस्टेबल थे। वह अपने परिवार के साथ लुधियाना के शिमलापुरी इलाके में रहते थे। उनके पड़ोस में 38 वर्षीय नीलम अपने दो बेटों के साथ रहती थी। दोनों परिवार आसपास रहते थे और बच्चों को लेकर उनके बीच कभी-कभार छोटी-मोटी कहासुनी भी होती रहती थी। हरप्रीत सिंह अपने बच्चों के लिए अक्सर खिलौने, कपड़े और दूसरी चीजें लेकर आते थे। इन चीजों को देखकर नीलम के बच्चे भी वैसी ही चीजों की मांग करते थे। नीलम आर्थिक या दूसरी वजहों से उनकी मांग पूरी नहीं कर पाती थी। पुलिस के मुताबिक, इसी बात को लेकर उसके मन में पड़ोसी परिवार के प्रति जलन बढ़ती गई। बच्चों की मांग पूरी न कर पाने की बात और पड़ोसी के परिवार से रंजिश ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया। इसी के चलते नीलम ने दिलरोज को निशाना बनाया। इस मामले में पुलिस जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, उसने बच्ची को अगवा कर उसकी हत्या करने की योजना बनाई थी।
बच्ची को स्कूटी पर बैठाकर सुनसान प्लॉट ले गई
28 नवंबर 2021 को ढाई साल की दिलरोज घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान नीलम उसे अपनी एक्टिवा पर बैठाकर ले गई। एल्डिको के पास एक सुनसान खाली प्लॉट में उसने पहले से गड्ढा खोद रखा था। वह बच्ची को उसी जगह लेकर पहुंची। पुलिस के मुताबिक, नीलम ने वहां बच्ची के साथ मारपीट की और उसके मुंह में मिट्टी भर दी। इसके बाद उसने बच्ची को पहले से खोदे गए गड्ढे में जिंदा दफना दिया। दम घुटने के कारण दिलरोज की मौत हो गई। घटना के बाद नीलम वापस अपने घर लौट आई। बच्ची के अचानक गायब होने से परिवार परेशान हो गया। माता-पिता और परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इस दौरान नीलम भी परिवार के साथ बच्ची को ढूंढने का नाटक करती रही, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
दिलरोज के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान एक फुटेज में नीलम बच्ची को अपनी स्कूटी पर बैठाकर ले जाती दिखाई दी। इस फुटेज के आधार पर पुलिस का शक उस पर गहरा गया। पुलिस ने नीलम को हिरासत में लेकर पूछताछ की। सख्ती से पूछताछ के दौरान उसने बच्ची की हत्या करने की बात कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस उसे लेकर उस खाली प्लॉट में पहुंची, जहां उसने गड्ढा खोदा था। नीलम की निशानदेही पर पुलिस ने वहां से दिलरोज का शव बरामद किया। बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने नीलम के खिलाफ हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया। मामले में IPC की धारा 364, 302 और 201 के तहत कार्रवाई की गई थी।
सेशन कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
मामले की सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट ने नीलम को दोषी करार दिया था। अदालत ने करीब दो साल पहले उसे फांसी की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के दौरान नीलम अदालत में रोने लगी थी और उसने जज से रहम की अपील की थी। नीलम ने अदालत में कहा था, “जज साहब, प्लीज मुझे बख्श दो। मेरे भी दो बच्चे हैं।” हालांकि, सेशन कोर्ट ने उसकी अपील स्वीकार नहीं की और उसे फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा दी थी। इस फैसले के बाद नीलम ने फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए सजा में राहत मांगी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद 23 सितंबर को उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।
हाईकोर्ट ने नीलम की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलते हुए उसके लिए 30 साल जेल में बिताना अनिवार्य किया है। आदेश के मुताबिक, इस अवधि में उसे सजा में कोई छूट नहीं मिलेगी। यानी उसे 30 साल तक जेल में रहना होगा। इस फैसले के बाद अब नीलम को फांसी नहीं दी जाएगी, लेकिन उसे लंबी अवधि तक जेल में रहना पड़ेगा। सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट का यह आदेश मामले में सजा को लेकर अहम बदलाव है। उधर, दिलरोज का परिवार इस फैसले के बाद शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। परिवार की ओर से मामले और हाईकोर्ट के आदेश को लेकर अपनी बात रखे जाने की संभावना है।
