Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की दो दिवसीय हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की दो दिवसीय हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ
Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में राजभाषा अनुभाग एवं केंद्रीय पुस्तकालय के समन्वय से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली द्वारा हिंदी पुस्तकों की दो दिवसीय प्रदर्शनी का सोमवार को शुभारंभ किया गया।
विश्वविद्यालय के शैक्षणिक खंड-4 में आयोजित इस प्रदर्शनी में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं की पुस्तकों का व्यापक संग्रह प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी रुचि के अनुरूप पुस्तकों की खरीदारी की।
प्रदर्शनी में कहानी, उपन्यास, कविता, निबंध, आलोचना सहित हिंदी साहित्य की विविध विधाओं की पुस्तकें उपलब्ध रहीं। इसके अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा की पुस्तकें भी प्रदर्शित की गईं। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा हिंदी पुस्तकों पर 20 प्रतिशत तथा अंग्रेजी पुस्तकों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की गई। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अपनी शैक्षणिक आवश्यकताओं और साहित्यिक रुचियों के अनुरूप पुस्तकें चुनने का अवसर मिला।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संदेश में कहा कि विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। पुस्तकों का नियमित अध्ययन न केवल ज्ञान के विस्तार में सहायक है, बल्कि यह रचनात्मकता, चिंतनशीलता और तार्किक क्षमता के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत होने के साथ-साथ व्यक्ति के बौद्धिक एवं रचनात्मक विकास का सशक्त माध्यम हैं। इस प्रकार की पुस्तक प्रदर्शनियां विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को पुस्तकों से जोड़ने और अध्ययन की रुचि विकसित करने में सहायक हैं।
विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि पुस्तकें ज्ञान, अनुभव और विचारों की अमूल्य धरोहर हैं। पुस्तकें व्यक्ति की दृष्टि को व्यापक बनाने के साथ-साथ उसकी कल्पनाशीलता, सृजनात्मकता और विश्लेषणात्मक क्षमता को भी विकसित करती हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के बीच पुस्तकों के अध्ययन की प्रासंगिकता बनी हुई है। विश्वविद्यालय में इस प्रकार की प्रदर्शनियों का आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने तथा हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि पुस्तकें हमें प्रेरित करती हैं और नए विचारों के सृजन का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से पुस्तकों को अपने अध्ययन और जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
प्रदर्शनी में शामिल विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में इस प्रकार की प्रदर्शनियां उन्हें अपनी रुचि और अध्ययन की आवश्यकता के अनुरूप पुस्तकें देखने, चुनने और खरीदने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह की पुस्तक प्रदर्शनियों के नियमित आयोजन की आवश्यकता जताई।
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