Haryana Land Rules: हरियाणा। हरियाणा के शहरी और पालिकाओं से सटे प्राइम लोकेशन वाले इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल को सरकार ने कानूनन बंद कर दिया है। अक्सर देखा गया है कि भू-माफिया और प्रॉपर्टी डीलर अवैध कॉलोनियों को विकसित करने और सरकारी टैक्स व नियमों से बचने के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त की जगह ‘अदला-बदली’ (Exchange) का रास्ता चुनते थे। अब इस तरह के किसी भी लूपहोल को खत्म करने के लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शहरों के अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की कैसी भी अदला-बदली हो, बिना सरकारी इजाजत के उसकी रजिस्ट्री मुमकिन नहीं होगी।
क्यों पैदा हुआ असमंजस और कैसे आया स्पष्टीकरण?
दरअसल, हरियाणा विधानसभा के पिछले बजट सत्र के दौरान सरकार ने ‘हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026’ को सदन से पारित करा लिया था। कानून बनने की प्रक्रिया के तहत यह फाइल राज्यपाल की मंजूरी के लिए राजभवन भेजी गई है, जहां से अभी अंतिम सहमति और अधिसूचना (Notification) जारी होना बाकी है।
इस तकनीकी देरी की वजह से जमीन की रजिस्ट्रियों को लेकर फील्ड में तैनात पंजीकरण अधिकारियों (तहसीलदारों) और राजस्व विभाग के सामने यह असमंजस था कि मौजूदा स्थिति में क्या नियम अपनाए जाएं। इसी को लेकर वित्तायुक्त राजस्व (FCR) ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से राय मांगी थी, जिस पर विभाग ने नीतिगत रुख साफ करते हुए कड़े नियंत्रण के निर्देश दिए हैं।
धारा 7-ए में संशोधन: समझिए क्या था भू-माफिया का वो ‘फर्जीवाड़ा’
इस पूरे कानूनी फेरबदल की जड़ें 1975 के मूल अधिनियम की धारा 7-ए से जुड़ी हैं। असल में, नियमों के मुताबिक किसी भी अधिसूचित शहरी क्षेत्र में एक एकड़ से कम खाली जमीन को बेचने, लीज पर देने या गिफ्ट करने से पहले टीसीपी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना जरूरी होता है।
लेकिन शातिर चालाकी के तहत पंजीकरण अधिकारियों के सामने ऐसे कई मामले आए जहां कागजों पर छोटे और बेहद कम कीमत वाले भूखंडों को दिखाकर, उनके बदले शहरों के भीतर स्थित बड़े और करोड़ों की कीमत वाले प्लॉटों की अदला-बदली कर ली जाती थी। कानूनी भाषा में इसे ‘एक्सचेंज’ कहा जाता था, लेकिन पर्दे के पीछे यह सीधे तौर पर टैक्स चोरी और बिना एनओसी के महंगी जमीनों को ठिकाने लगाने का अवैध कारोबार था। इसी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब धारा 7-ए का दायरा बढ़ाकर इसमें एक्सचेंज डीड को भी शामिल कर लिया गया है।
अवैध कॉलोनियों पर सीधा प्रहार Haryana Land Rules
सरकार के इस कदम का सीधा असर उन कॉलोनाइजरों पर पड़ेगा जो शहरों के मास्टर प्लान से बाहर या ग्रीन बेल्ट के आसपास अवैध रूप से प्लॉट काटते हैं। जमीन की अदला-बदली के नाम पर जो अप्रत्यक्ष खरीद-फरोख्त हो रही थी, उस पर रोक लगने से ऐसी कॉलोनियों में प्लॉटों की अनधिकृत रजिस्ट्रियां पूरी तरह ठप हो जाएंगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब प्रदेश भर की तहसीलों में जमीनों के इस ‘एक्सचेंज खेल’ पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।

