Gurugram News: साइबर सिटी गुरुग्राम में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले उपभोक्ताओं को चूना लगाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मानेसर साइबर अपराध पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि इलाके में एक ऐसा फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है, जो देश की जानी-मानी ग्रोसरी चेन ‘बिग बास्केट’ और ‘डी-मार्ट’ के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
ये शातिर ठग हूबहू असली जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें और लिंक तैयार करते थे। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाजार रेट से बेहद सस्ते दामों पर घरेलू सामान और राशन देने के विज्ञापन चलाकर आम लोगों को अपनी वेबसाइट पर आने के लिए मजबूर करते थे।
सस्ते सामान का लालच देकर खाली कर देते थे बैंक खाते
एसीपी साइबर क्राइम गौरव फौगाट ने इस पूरे नेक्सस का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों का जाल बिछाने का तरीका बेहद पेशेवर था। जैसे ही कोई सीधा-साधा ग्राहक इनके झांसे में आकर सस्ते सामान के लालच में ऑर्डर बुक करता था, ये लोग एडवांस पेमेंट या डिलीवरी चार्ज के नाम पर उनसे ऑनलाइन भुगतान करवा लेते थे।
कई बार ये लिंक के जरिए ग्राहकों के फोन में रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवा देते थे, जिससे उनके बैंक खातों की गोपनीय जानकारी इन ठगों के पास पहुंच जाती थी। इसके बाद पलक झपकते ही पीड़ितों के खातों से मोटी रकम साफ कर दी जाती थी।
पुलिस रेड में ५ आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में गैजेट्स बरामद
पुख्ता इनपुट मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस की एक विशेष टीम ने चिन्हित ठिकाने पर अचानक छापेमारी की। मौके पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर से पुलिस ने पांच आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। रेड के दौरान इनके कब्जे से ठगी की वारदातों में इस्तेमाल होने वाले कई स्मार्टफोन्स, एक्टिवेटेड फर्जी सिम कार्ड, लैपटॉप और पीड़ितों के डेटा से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इन सभी उपकरणों को जांच के लिए जब्त कर लिया है।
पुलिस की अपील: भारी डिस्काउंट वाले विज्ञापनों से रहें सावधान
पकड़े गए आरोपियों से साइबर सेल की टीम लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट के तार देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं और इनके बैंक खातों को खंगालने पर लाखों रुपये के फ्रॉड का खुलासा होने की उम्मीद है।
एसीपी गौरव फौगाट ने आम जनता से अपील की है कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर दिखने वाले अत्यधिक छूट (भारी डिस्काउंट) के विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी ऐप या वेबसाइट पर अपनी बैंकिंग डिटेल साझा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच जरूर कर लें।

