Kurukshetra News: रामचंद्र कॉलोनी में मंगलवार की रात आम दिनों की तरह ही थी, लेकिन पानी की सप्लाई शुरू होते ही यहां एक ऐसा वाकया घटा जिससे पूरी कॉलोनी में सनसनी फैल गई। दरअसल, रात के समय जब घरों में पीने के पानी की आपूर्ति शुरू हुई, तो लोग अपने बर्तन भरने के लिए नलों की तरफ दौड़े।
इसी दौरान एक घर में जैसे ही पानी की टोटी (नल) खोली गई, तो पानी के तेज बहाव के साथ एक जिंदा सपोलिया सीधे बर्तन में आ गिरा। पानी में रेंगते हुए सांप के बच्चे को देखते ही परिवार के लोगों की चीख निकल गई। देखते ही देखते यह खबर पूरी कॉलोनी में आग की तरह फैल गई और लोग अपने-अपने घरों के नल बंद कर दहशत में आ गए।
बच्चे सहमे, गृहिणियों ने जताई गहरी नाराजगी
इस खौफनाक अनुभव को बयां करते हुए स्थानीय गृहिणी चन्द्रावल ने बताया कि मंगलवार रात जब वे रसोई में पानी का बर्तन साफ कर रही थीं, तभी नल से पानी के साथ यह सपोलिया बाहर आ गिरा। उन्होंने कहा, “यह बेहद डरावना था। अगर अंधेरे में ध्यान न जाता, तो यह जहरीला जीव किसी के पेट में भी जा सकता था या किसी को काट लेता।
इस घटना के बाद से घर के छोटे बच्चे इस कदर सहमे हुए हैं कि वे अब नल के पास जाने या पानी पीने से भी कतरा रहे हैं।” कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इस बात पर गहरा रोष जताया कि जिस पानी को वे अपने बच्चों को पिला रही हैं, वह इस कदर असुरक्षित और दूषित हो चुका है।
जनस्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
यह कोई साधारण समस्या नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर सैकड़ों लोगों की जिंदगी से जुड़ा मामला है। इस घटना ने शहर की पेयजल व्यवस्था और जनस्वास्थ्य विभाग (पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट) के दावों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभाग द्वारा मुख्य वॉटर टैंकों और सप्लाई लाइनों की समय पर सफाई नहीं की जाती है।
कई जगहों पर पाइपलाइनें इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं कि उनमें लीकेज के रास्ते गंदा पानी और कीड़े-मकोड़े आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। लोगों का कहना है कि वे हर महीने पानी का बिल चुकाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बीमारी और खौफ परोसा जा रहा है।
कॉलोनी वासियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
सप्लाई के पानी में सपोलिया मिलने के बाद से रामचंद्र कॉलोनी के लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। कॉलोनी के गणमान्य लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने जल्द ही वाटर सप्लाई के टैंकों की मुकम्मल सफाई नहीं कराई और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, तो वे अधिकारियों के दफ्तर का घेराव करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, एहतियात के तौर पर कॉलोनी के अधिकांश परिवारों ने सरकारी पानी का इस्तेमाल बंद कर दिया है और वे दूर-दराज के इलाकों या निजी टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं।

