Kurukshetra News: धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी कुरुक्षेत्र की तस्वीर आने वाले दिनों में पूरी तरह बदलने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा शहर के लिए 27.9 किलोमीटर लंबे बाईपास को हरी झंडी दिए जाने के बाद से ही पूरे इलाके के रियल एस्टेट मार्केट के तेवर बदल गए हैं।
इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की सुगाहट मिलते ही कुरुक्षेत्र और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में प्रॉपर्टी के रेट आसमान छूने लगे हैं। बाहरी निवेशकों और स्थानीय डीलरों के बीच नेशनल हाईवे के आस-पास पैर जमाने की होड़ मची हुई है।
एक करोड़ की जमीन के दाम हुए तीन करोड़, फिर भी खरीदारों की लाइन
प्रॉपर्टी बाजार के जानकारों की मानें तो इस बाईपास की घोषणा का सबसे बड़ा और सीधा असर कुरुक्षेत्र के जमीनी समीकरणों पर पड़ा है। जो कृषि और कमर्शियल जमीनें कुछ महीने पहले तक ₹1 करोड़ प्रति एकड़ के भाव पर कोई पूछ नहीं रहा था, आज उनके सौदे ₹2 से ₹3 करोड़ प्रति एकड़ में हो रहे हैं।
हालांकि, जिला प्रशासन ने किसी भी तरह के कानूनी पेच से बचने के लिए बाईपास के मूल रूट में आने वाले खसरा नंबरों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इसके बावजूद, इस प्रतिबंधित दायरे से ठीक बाहर लगती जमीनों को झटकने के लिए निवेशक मोटी रकम फेंकने को तैयार हैं।
ज्योतिसर से मथाना तक बनेगा रूट, कुरुक्षेत्र-पेहोवा मार्ग से जुड़ेगा सिरा
यह बाईपास कुरुक्षेत्र के शहरी ढांचे के लिए एक लाइफलाइन की तरह काम करेगा। ₹2071 करोड़ के भारी-भरकम बजट से तैयार होने वाला यह 27.9 किलोमीटर लंबा मार्ग कुरुक्षेत्र-पेहोवा मार्ग पर स्थित ज्योतिसर के पास इंदबडी से शुरू होगा। यहां से घूमते हुए यह बाईपास सीधे मथाना गांव (स्टेट हाईवे-6) पर जाकर मिलेगा।
इस पूरे रूट के दौरान यह नया मार्ग किरमाच रोड, अमीन रोड, स्टेट हाईवे-6, MDR-119 और सबसे महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-44 (जीटी रोड) जैसे मुख्य रास्तों को आपस में क्रॉस करते हुए जोड़ेगा, जिससे शहर के चारों तरफ एक मजबूत रिंग नेटवर्क तैयार हो जाएगा।
25 गांवों के किसानों की चमकेगी किस्मत, 217 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए करीब 217 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। यह बाईपास कुल 25 गांवों की सीमाओं से होकर गुजरेगा, जिसमें थानेसर उपमंडल के 24 गांव और पेहोवा उपमंडल का 1 गांव शामिल है। जिन किसानों की जमीनें इस प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही हैं, उन्हें मुआवजा मिलने की उम्मीद है, वहीं हाईवे के किनारे बची उनकी बाकी जमीनों की वैल्यू रातों-रात करोड़ों में पहुंच चुकी है।
भारी वाहनों के चक्रव्यूह और प्रदूषण से मिलेगी परमानेंट मुक्ति
इस बाईपास के बनने का सबसे बड़ा फायदा कुरुक्षेत्र के स्थानीय निवासियों को मिलेगा। वर्तमान में पंजाब, उत्तर प्रदेश, यमुनानगर और कैथल की तरफ से आने-जाने वाले भारी कमर्शियल वाहनों को मजबूरन कुरुक्षेत्र शहर के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे पूरा शहर दिनभर रेंगता रहता है।
बाईपास चालू होने के बाद ये तमाम गाड़ियां बाहर से बाहर निकल जाएंगी। इससे न केवल यात्रियों के समय और डीजल की बचत होगी, बल्कि शहर के लोगों को दशकों पुराने ट्रैफिक जाम, सड़कों की टूट-फूट और जानलेवा वायु प्रदूषण से हमेशा के लिए परमानेंट मुक्ति मिल जाएगी।
आर्थिक प्रगति का नया कॉरिडोर: निवेश से पहले रखें यह सावधानी
प्रॉपर्टी एक्सपर्ट धर्मवीर सिंह गोलन का कहना है कि यह बाईपास सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि कुरुक्षेत्र के लिए आर्थिक प्रगति का एक नया कॉरिडोर साबित होने जा रहा है।
बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से इस रूट पर आने वाले समय में नए उद्योग, लॉजिस्टिक्स पार्क और बड़े होटल्स-रेस्टोरेंट्स खुलने की पूरी संभावना है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को सचेत करते हुए यह सलाह भी दी है कि वे कुरुक्षेत्र में कहीं भी पैसा लगाने से पहले जिला प्रशासन की वेबसाइट या पटवारखाने से उन खसरा नंबरों की अच्छे से जांच कर लें, जिन्हें सरकार ने बाईपास के लिए अधिग्रहित या प्रतिबंधित घोषित किया है।

