Haryana News: गुरुग्राम में वजन घटाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, फर्जी कॉल सेंटर से 3 लड़कियां गिरफ्तारफेसबुक-इंस्टाग्राम पर हर्बल दवाओं का झांसा, गुजरात के लोगों से ठगे करोड़ों रुपये

Haryana News: साइबर सिटी गुरुग्राम में बैठे ठगों ने अब लोगों की सेहत और उनकी कमजोरियों को ठगी का नया हथियार बना लिया है। उद्योग विहार इलाके में साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे ही फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो मोटे लोगों को निशाना बनाकर उन्हें पतले होने का झांसा देता था।

पुलिस ने मौके से तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान दिल्ली के आया नगर की रहने वाली मंदीप (हाल निवासी चक्करपुर), रंगपुरी की नेहा और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की वर्षा (हाल निवासी सुशांत लोक) के रूप में हुई है। इनके खिलाफ साइबर क्राइम वेस्ट थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।

इंस्टाग्राम-फेसबुक पर हर्बल दवाओं का विज्ञापन, ऐसे फंसते थे लोग

एसीपी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने इस रैकेट के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि ये लोग ‘Curest Science and Wellness Pvt. Ltd.’ के नाम से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे।

फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आकर्षक विज्ञापन चलाए जाते थे, जिनमें आयुर्वेदिक और हर्बल तरीकों से चंद दिनों में वजन घटाने के बड़े-बड़े दावे होते थे। जैसे ही कोई यूजर वजन घटाने की चाहत में इन विज्ञापनों या लिंक्स पर क्लिक करता, उसका डेटा सीधे इस कॉल सेंटर के पास पहुंच जाता था। इसके बाद शुरू होता था असली खेल।

खुद बनती थीं डॉक्टर और डाइटिशियन, ठग लिए करोड़ों रुपये

कॉल सेंटर में बैठी ये लड़कियां खुद को नामी ब्यूटीशियन, डाइटिशियन और डॉक्टर बताकर लोगों से बात करती थीं। वे बकायदा मरीज की तरह उनकी केस स्टडी करतीं और फिर उन्हें हजारों रुपये का कस्टमाइज्ड कोर्स बेच देती थीं।

जांच में पता चला है कि इन दवाइयों से किसी का वजन रत्ती भर भी कम नहीं होता था। सौदा करते वक्त ये ठग दावा करते थे कि अगर वजन कम नहीं हुआ तो ‘100% पैसा वापस’ (मनी बैक गारंटी) मिलेगा। लेकिन जब परेशान लोग पैसे वापस मांगते, तो आरोपी उनके नंबर ब्लॉक कर देते थे।

गुजरात और अन्य राज्यों में फैला था जाल, बैकएंड पर बैठे हैं बड़े आका

पुलिस की तफ्तीश में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस गिरोह का मुख्य टारगेट गुजरात के लोग थे, जिनसे इन्होंने वजन घटाने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये ऐंठ लिए हैं।

गुजरात के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी इनका नेटवर्क फैला हुआ था। बरामद किए गए 102 मोबाइल और 150 सिम कार्ड कंपनी के अलग-अलग कर्मचारियों के नाम पर अलॉट थे। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार की गईं लड़कियां तो सिर्फ मोहरा थीं, इस पूरे फर्जीवाड़े का रिमोट कंट्रोल कंपनी के मैनेजर, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO), डायरेक्टर्स और मालिकों के हाथ में था, जिनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।