GenZ corporate culture: भारतीय कॉरपोरेट जगत में लंबे समय से एक अलिखित नियम रहा है—बॉस को खुश रखने के लिए देर तक बैठना, वीकेंड पर भी काम के ईमेल देखना और सीनियर के खराब बर्ताव को चुपचाप सह जाना। लेकिन अब दफ्तरों में कदम रख रही ‘जेन-जी’ (GenZ) यानी नई पीढ़ी ने इन पुराने नियमों को सिरे से खारिज करना शुरू कर दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट ने इस समय देश के कामकाजी वर्क-कल्चर में आ रहे एक बड़े मनोवैज्ञानिक बदलाव को सतह पर ला दिया है। यह पोस्ट दर्शाती है कि नए दौर के युवा नौकरी को सिर्फ एक जरिया मानते हैं, अपनी जिंदगी का इकलौता मकसद नहीं।
जब एसी खराब हुआ, तो पूरा ग्रुप पहुंच गया कैफे
एक्स (ट्विटर) पर @RijhwaniSheetal नाम के हैंडल से शेयर की गई इस कहानी में शीतल ने अपनी बहन के दफ्तर का एक मजेदार वाकया बताया। उन्होंने लिखा कि उनकी बहन के ऑफिस में जेन-जी युवाओं का एक पूरा ग्रुप है, जो अपने तय नियमों के मुताबिक काम करता है। एक दिन दफ्तर का एयर कंडीशनर (AC) खराब हो गया, जिससे वहां बैठना दूभर हो गया था।
पुरानी पीढ़ी के लोग जहां पसीना बहाते हुए काम करते रहे, वहीं इस युवा ब्रिगेड ने तुरंत अपना लैपटॉप उठाया और पास के एक कैफे में शिफ्ट हो गए। उन्होंने एचआर को दो टूक कह दिया कि जैसे ही दफ्तर का एसी ठीक होगा, वे अपनी सीट पर लौट आएंगे।
‘मिलेनियल्स’ नहीं दिखा पाते ऐसा हौसला
इस पोस्ट में कॉरपोरेट जगत की दो पीढ़ियों के बीच के बड़े अंतर को भी रेखांकित किया गया है। शीतल की बहन के मुताबिक, उनके इस ग्रुप में सभी लड़के-लड़कियां जेन-जी हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या ‘मिलेनियल्स’ (पुरानी पीढ़ी) के लोग भी उनके साथ इस तरह एकजुट रहते हैं? तो जवाब मिला कि पिछली पीढ़ी के लिए अपनी सीमाएं तय करना और खुलकर स्टैंड लेना थोड़ा मुश्किल होता है। मिलेनियल्स अक्सर नौकरी जाने के डर, ईएमआई के बोझ या बॉस की नाराजगी के खौफ में चुपचाप सब कुछ सहने के आदी हो चुके हैं, जबकि नई पीढ़ी अपने अधिकारों को लेकर बेहद मुखर है।
अधिकारों के लिए एचआर का रुख करने में कोई झिझक नहीं
यह युवा केवल समय पर घर ही नहीं निकलते, बल्कि काम के माहौल में गरिमा की भी मांग करते हैं। पोस्ट के अनुसार, अगर कोई मैनेजर या सीनियर इन युवाओं के साथ अनुचित भाषा या गलत तरीके से पेश आता है, तो ये उसे सहने के बजाय सीधे एचआर विभाग में शिकायत दर्ज कराते हैं।
सुखद बात यह भी है कि अब कंपनियों के एचआर भी इस बदलाव को भांप रहे हैं और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। इस वायरल पोस्ट पर इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है। कुछ लोग इसे अनुशासनहीनता मान रहे हैं, तो कामकाजी पेशेवरों का एक बहुत बड़ा वर्ग इसे मानसिक स्वास्थ्य और एक स्वस्थ कॉरपोरेट कल्चर के लिए बेहद जरूरी कदम बता रहा है।

