Kurukshetra Congress Leaders Duped: राहुल गांधी का फर्जी सचिव बनकर कांग्रेस नेताओं से ऐंठे 10 लाख रुपये, जेल से चल रहा था खेलवॉट्सऐप कॉल पर राहुल गांधी का पीए बनकर नेताओं को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़

Kurukshetra Congress Leaders Duped: हरियाणा की सियासत में इन दिनों कुरुक्षेत्र के दो कांग्रेस नेताओं के साथ हुई एक बेहद हाई-प्रोफाइल और शातिराना ठगी की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। दिल्ली दरबार में मजबूत पैठ और संगठन में चमचमाता हुआ बड़ा पद पाने की चाहत में कुरुक्षेत्र के दो कद्दावर नेता एक ऐसे जालसाज के बुने जाल में फंस गए, जिसने खुद को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बेहद करीबी और उनका निजी सचिव कनिष्क सिंह बताया था। कनिष्क सिंह का फर्जी मुखौटा पहनकर इस ठग ने नेताओं को न सिर्फ बड़े-बड़े सपने दिखाए, बल्कि संगठन के नाम पर उनसे पूरे 10 लाख रुपये की मोटी रकम भी ऐंठ ली। जब काफी दिनों तक कोई पद नहीं मिला और छानबीन की गई, तब जाकर नेताओं के होश उड़े। अब इस मामले की लिखित शिकायत कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक (SP) चंद्रमोहन को सौंपी गई है।

वॉट्सऐप कॉल से शुरू हुआ झांसे का खेल; जेडब्ल्यू मैरियट की पार्किंग में रात 11 बजे की गई ‘डीलिंग’

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इस पूरी पटकथा की शुरुआत बीती 24 जनवरी को एक वॉट्सऐप कॉल के जरिए हुई थी। फोन करने वाले ने बेहद सधे हुए और रसूखदार अंदाज में अपना परिचय राहुल गांधी के सचिव कनिष्क सिंह के रूप में दिया। उसने नेताओं से कहा कि कांग्रेस के ‘संगठन सृजन कार्यक्रम’ के तहत उत्तराखंड के शीर्ष नेताओं के लिए चंडीगढ़ में एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। पार्टी चाहती है कि कुरुक्षेत्र के वफादार पदाधिकारी इसमें ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं का जिम्मा संभालें। शुरुआत में उसने होटल बुक करने को कहा, लेकिन बाद में पैंतरा बदलते हुए कहा कि व्यवस्थाएं पार्टी खुद देख लेगी, वे बस फंड का इंतजाम कर दें।

आलाकमान का सीधा निर्देश समझकर पीसीसी सदस्य और जिला संगठन सचिव ने आनन-फानन में पांच-पांच लाख रुपये (कुल 10 लाख) का प्रबंध किया। उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित नामी जेडब्ल्यू मैरियट होटल पहुंचकर दीपक नाम के शख्स को यह रकम सौंप दें। कड़ाके की ठंड में उसी रात करीब 11 बजे दोनों नेता होटल की पार्किंग में पहुंचे, जहां कथित कनिष्क सिंह से फोन पर दोबारा बात करवाने के बाद उन्होंने नोटों से भरा बैग ‘दीपक’ के हवाले कर दिया।

बदनामी के डर से साधे रखी चुप्पी; उत्तराखंड के भी कई सियासी चेहरे हुए हैं शिकार

पैसे देने के कुछ दिनों बाद जब नेताओं ने पार्टी स्तर पर इस ट्रेनिंग कैंप के बारे में गुपचुप तरीके से पता करना शुरू किया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चंडीगढ़ या कुरुक्षेत्र की पंजाबी धर्मशाला में ऐसे किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम की रूपरेखा ही तैयार नहीं की गई थी। ठगी का अहसास होते ही दोनों नेताओं पर जैसे घड़ों पानी पड़ गया। शुरुआत में अपनी राजनीतिक साख और बदनामी के डर से दोनों ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। हालांकि, जब उन्हें भनक लगी कि यह ठग इसी तरह का झांसा देकर उत्तराखंड के भी कई रसूखदार नेताओं को अपनी कमान पर ले चुका है और करोड़ों की चपत लगा चुका है, तब जाकर उन्होंने कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।

अमृतसर का ‘गौरा’ निकला असली बहरूपिया, पुलिस की जांच में खुली परतें

मामला जब एसपी चंद्रमोहन के पास पहुंचा, तो उन्होंने तुरंत थाना शहर प्रभारी नरेश कुमार को तकनीकी जांच के आदेश दिए। पुलिस ने जब मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल (CDR), वॉट्सऐप चैट्स, पैसों के लेनदेन के समय की सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों को खंगाला, तो कनिष्क सिंह का मुखौटा पूरी तरह उतर गया। पुलिस तफ्तीश में साफ हुआ कि खुद को वीआईपी बताने वाला यह शख्स असल में पंजाब के अमृतसर (मजीठा रोड, नेहरू कॉलोनी) का रहने वाला शातिर अपराधी गौरव कुमार शर्मा उर्फ गौरा है। दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि गौरव वर्तमान में उत्तराखंड के देहरादून स्थित राजपुर थाने में दर्ज एक अन्य धोखाधड़ी के मामले में पहले से ही न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद है। पुलिस अब कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट लेकर आरोपी को कुरुक्षेत्र लाने की तैयारी कर रही है ताकि इस रैकेट के अन्य सहयोगियों का भी पर्दाफाश किया जा सके।