Haryana Government scheme: सिरसा और आसपास के इलाकों में पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब मछली पालन को लेकर भी किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है। इसी बदलाव को रफ्तार देने और युवाओं को इस क्षेत्र में नए रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग ने अपनी तिजोरी खोल दी है।
सरकार का मुख्य फोकस अब मत्स्य पालन में आने वाली लागत को कम करना और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करना है। विभाग की इस नई योजना के तहत स्मार्ट एक्वाकल्चर, बायो-सिक्योरिटी (जैव सुरक्षा), जल गुणवत्ता प्रबंधन, वैल्यू एडिशन और कोल्ड चेन जैसे आधुनिक और डिजिटल समाधानों पर काम करने वाले उद्यमियों को वित्तीय संबल दिया जाएगा।
श्रेणियों के हिसाब से तय की गई है मदद की सीमा
सरकार ने अलग-अलग प्रकार के प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय मदद का एक स्पष्ट खाका तैयार किया है, ताकि छोटे स्टार्टअप से लेकर बड़े इनक्यूबेशन सेंटरों तक सबको सही लाभ मिल सके। तय मानकों के अनुसार:
इनक्यूबेशन सेंटर: सबसे बड़ी मदद तीन करोड़ रुपये तक की है।
प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और पायलट प्रोजेक्ट: इन परियोजनाओं के लिए दो करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
नवोन्मेषी (इनोवेटिव) योजनाएं: ₹1 करोड़ तक की सहायता दी जाएगी।
स्टार्ट-अप: इस क्षेत्र में नई शुरुआत करने वाले युवाओं को 50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी।
कागजी कार्रवाई और शर्तें बेहद सख्त
योजना जितनी आकर्षक है, इसके नियम भी उतने ही कड़े रखे गए हैं ताकि सरकारी पैसे का दुरुपयोग न हो। पहली और सबसे बुनियादी शर्त यह है कि आवेदक के पास हरियाणा सरकार का ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) होना जरूरी है।
इसके अलावा, आवेदक को एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के साथ हलफनामा भी देना होगा कि निर्माण के बाद प्रोजेक्ट के रखरखाव और परिचालन का सारा खर्च वह खुद उठाएगा। जमीन को लेकर भी नियम स्पष्ट हैं; अगर जमीन लीज (पट्टे) पर ली गई है, तो बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष और अन्य छोटे कार्यों के लिए कम से कम 7 वर्ष का पंजीकृत पट्टा दस्तावेज होना अनिवार्य है।
कैसे करें आवेदन और क्या चाहिए दस्तावेज?
इच्छुक किसानों और उद्यमियों को आवेदन के लिए अपने जिले के मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क करना होगा। आवेदन के साथ जन्मतिथि प्रमाण पत्र, दसवीं की मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, भूमि के मालिकाना हक का रिकॉर्ड, बैंक खाता, पैन कार्ड और विभाग के साथ होने वाला अनुबंध पत्र लगाना होगा।
इसके अलावा, सबसे जरूरी है ‘मत्स्य प्रशिक्षण प्रमाण पत्र’ यानी आवेदक का मछली पालन में प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र के मुताबिक, आवेदन सीधे स्वीकार नहीं होंगे; पहले जिला स्तरीय कमेटी पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता जांचेगी, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य स्तर पर भेजा जाएगा। यह पहल न केवल सिरसा में नील क्रांति को नया आयाम देगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी धरातल पर मजबूत करेगी।

