Haryana News: हरियाणा के शहरी क्षेत्रों, खासकर एनसीआर के गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे महानगरों में एक ही प्लॉट पर कई फ्लैट बनाकर बेचने के चलन पर अब सरकारी डंडा चलने जा रहा है। राज्य सरकार ने बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा और अनियंत्रित होती आबादी को नियंत्रित करने के लिए अपने ‘बिल्डिंग कोड’ में एक बड़ा संशोधन करने का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया है।
इस नए नीतिगत बदलाव के लागू होने के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, करनाल, हिसार, झज्जर, रोहतक और सोनीपत जैसे शहरों के हुडा (HSVP) सेक्टरों और लाइसेंसशुदा कॉलोनियों में एक फ्लोर पर दो या तीन फ्लैट खड़े करने की मनमानी पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ रही थी भारी
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (Town and Country Planning Department) के निदेशक अमित खत्री द्वारा जारी ड्राफ्ट के पीछे सबसे बड़ी वजह हाल के दिनों में सामने आई आगजनी और शार्ट सर्किट की खौफनाक घटनाएं हैं। दरअसल, जब कोई आर्किटेक्ट किसी मकान का नक्शा पास कराता है, तो सीढ़ियां, लिफ्ट, पार्किंग, पानी-बिजली का लोड और सबसे महत्वपूर्ण ‘इमरजेंसी एग्जिट’ (निकासी मार्ग) उस प्लॉट की एक तय क्षमता के अनुसार डिजाइन किए जाते हैं।
लेकिन मुनाफे के चक्कर में बिल्डर्स और मकान मालिक एक ही फ्लोर को दो-तीन हिस्सों में बांटकर स्वतंत्र फ्लैट बना देते थे। नतीजा यह हुआ कि जिस प्लॉट पर चार परिवारों को रहना था, वहां आठ से बारह परिवार रहने लगे। ऐसे में किसी भी आपदा, जैसे आग लगने या भूकंप आने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना दमकल और बचाव दलों के लिए एक दुःस्वप्न बन जाता है।
जोनिंग प्लान और आर्किटेक्चरल कंट्रोल का करना होगा सख्ती से पालन
नए नियमों के मुताबिक, किसी भी रिहायशी इमारत को संबंधित क्षेत्र के स्वीकृत ‘जोनिंग प्लान’ और ‘आर्किटेक्चरल कंट्रोल शीट’ के दायरे में रहकर ही बनाना होगा। अगर किसी ने एक मंजिल को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की, तो उसका न केवल चालान होगा बल्कि इमारत को अवैध घोषित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का उल्लंघन रुकेगा और कॉलोनियों की आंतरिक सड़कों पर होने वाले सीवरेज ओवरफ्लो, पानी की किल्लत और गाड़ियों की अवैध पार्किंग जैसी समस्याओं से जूझ रहे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल इस ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में डाल दिया गया है और आगामी 25 जुलाई तक इस पर जनता की राय मांगी गई है, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

